सल्फास बना ज़हर का दूसरा नाम, पाकुड़ में बेखौफ़ बिक रही मौत की गोलियां, जहर के सौदागरों पर कब गिरेगी गाज ?

    सल्फास बना ज़हर का दूसरा नाम, पाकुड़ में बेखौफ़ बिक रही मौत की गोलियां, जहर के सौदागरों पर कब गिरेगी गाज ?

    पाकुड़(PAKUR):पाकुड़ जिले में सल्फास टेबलेट से हो रही लगातार मौतें अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है. बीते दिनों ही एक पति-पत्नी ने सल्फास खाकर अपनी जान गंवा दी.सल्फास टेबलेट सिर्फ कृषि कार्य के लिए उपयोग की जाने वाली कीटनाशक है.इसे किसी मेडिकल स्टोर पर बेचना मना है. यह केवल अधिकृत कृषि बीज भंडारों से ही किसानों को बेचा जा सकता है, वो भी कड़े नियमों के तहत, लेकिन अफसोस, आज पाकुड़ जिले में यह जानलेवा ज़हर खुलेआम, बिना जांचे-परखे, किसी को भी बेचा जा रहा है.

    क्या सल्फास अब सामान्य प्रोडक्ट बन गया है ?

    यह सवाल अब हर नागरिक और प्रशासन के सामने खड़ा है. ऐसी लापरवाही न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि सीधे-सीधे ज़िंदगियों से खिलवाड़ है. सल्फास की आसान उपलब्धता ने आत्महत्या को जैसे एक विकल्प बना दिया है. THE NEWS POST आग्रह करता है कि पाकुड़ जिला उपायुक्त की ओर से सल्फास की बिक्री को लेकर कड़ा नियम लागू किया जाए.

    क्या होने चाहिए नियम

    जिसमे टेबलेट देने से पहले दो गवाहों की उपस्थिति में लिखित पत्र लिया जाए. पत्र में साफ तौर पर लिखा हो कि इसका उपयोग केवल कृषि कार्य में किया जाएगा. किसी भी दुरुपयोग की स्थिति में वही दोनों व्यक्ति जिम्मेदार होंगे.सल्फास कोई आम दवा नहीं यह ज़हर है. और जब ज़हर कानून से ऊपर हो जाए, तो मौत का खेल शुरू हो जाता है.अब वक्त है चेतने का ताकि अगली मौत से पहले हम ज़िम्मेदार बने.

    रिपोर्ट; नंद किशोर मंडल


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