झारखंड का ऐसा गांव जहां पानी की किल्लत से जूझ रहे हजारों लोग, नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हुए ग्रामीण

    झारखंड का ऐसा गांव जहां पानी की किल्लत से जूझ रहे हजारों लोग, नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हुए ग्रामीण

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग होकर अलग राज्य बना था. ताकि झारखंड के नागरिकों का विकास हो सके औऱ गांव-गांव तक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके. लेकिन हाल तो यह है कि राज्य अलग हुए 23 साल हो गए हैं. लेकिन आज भी राज्य में कुछ ऐसे गांव है, जहां आज भी मूल भूत सुविधाएं लोगों को नहीं मिल रही है. यहां आज भी लोग एक बूंद पानी के लिए मीलों चलते हैं तब जा कर अपना प्यास बुझाते हैं. कुछ ऐसा ही हाल पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल स्थित जोनबनी गांव के उलडीह टोला के लोगों का है.

    ग्रामीण नदी का पानी पीने को मजबूर

    मिली जानकारी के अनुसार यहां के लोग साफ पानी के लिए कई सालों से भागदौड़ कर रहे है. यहां के लोगों का कहना है कि राज्य अलग हुए 23 साल हो गए है. लेकिन गांव में एक बार भी सरकारी चापाकल और ना ही सरकारी कुआं बनाया गया. जिसके कारण गांव के लोग पीने के पानी लाने के लिए सवर्णरेखा नदी जाते है और वहां जा कर नदी किनारे गड्ढा खोदकर पीने का पानी लाते हैं. वह भी पूरी तरह स्वच्छ नहीं रहता.

    साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि पानी की दिक्कत को लेकर वे लोग कई बार इलाके के विधायक, सांसद और मुखिया  से गांव में चापाकल और कुआं बनाने के लिए गुहार लगाए है. लेकिन अभी तक किसी के भी द्वारा कुछ पहल नहीं की गई है.अब देखना यह है कि राज्य के मुखिया एक तरफ पूरे राज्य में विकास की गाड़ी दौड़ना चाहते है. लेकिन घाटशिला के ग्रामीणों को कब तक पीने का पानी नसीब होता है.   


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