पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष: पलामू के एक गांव की 70% आबादी प्यास से बेहाल, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग और मवेशी

    पानी की हर बूंद के लिए संघर्ष: पलामू के एक गांव की 70% आबादी प्यास से बेहाल, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग और मवेशी

    पलामू(PALAMU): पलामू के ग्राम कजरू कला थाना पांडू जिला पलामू अंतर्गत कजरू कला ग्राम में लगभग 70-80% आबादी जल संकट के अभाव से गुजर रही हैं, जिसकी सुध लेने वाले कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं.

    आपको बता दें की यह गांव एक अनुसूचित जाति यानी दलित समाज बहुल गांव है, जिसमें अधिकांश पुरुष प्रवासी मजदूर के तौर पर काम करने के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं. वहीं दूसरी ओर गांव में गंभीर जल संकट से लोग जूझ रहे हैं. इस कारण उन्हें अपने माथे पर 3 से 5 किलोमीटर कि दूरी से पानी लाना पड़ता है. यह दृश्य आधुनिक समाज एवं विकास की पोल खोल रही है. 

    वहीं यह क्षेत्र पूर्व से ही घोर नक्सल प्रभावित, विकास विहीन एवं मूलभूत सुविधा से वंचित क्षेत्र रहा है. आजादी के इतने दिन बीत जाने के बाद भी इस गांव कि 70 से 80% आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही हैं. सबसे दुखद बात यह है कि अधिकांश पुरुष वर्ग को रोजी रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों में जाते हैं जिसके बाद महिलाओं पर पानी लेने के क्रम में असामाजिक तत्वों के लोगों द्वारा दुर्व्यवहार भी किया जाता है. 

    ऐसे में सदियों से पानी कि किल्लत झेल रहे ग्राम कजरू कला में इंसान के साथ-साथ मवेशी भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और लगातार जानवरों की मृत्यु हो रही है. इससे ग्रामवासियों को आर्थिक क्षति भी हो रही है.


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