तो क्या अब बदल जाएगा लालू प्रसाद के "गरीब रथ" एक्सप्रेस का नाम, पढ़िए कब और क्यों शुरू हुई थी यह ट्रेन !

    तो क्या अब बदल जाएगा लालू प्रसाद के "गरीब रथ" एक्सप्रेस का नाम, पढ़िए कब और क्यों शुरू हुई थी यह ट्रेन !

    धनबाद(DHANBAD) : "गरीब रथ" एक्सप्रेस का नाम तो आपने जरूर सुना होगा. ट्रेन पर चढ़े भी होंगे. इस ट्रेन की शुरुआत 2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने की थी. ट्रेन चलाने का उनका मकसद था कि गरीब और मध्यम वर्गीय लोग भी कम कीमत पर एसी  में यात्रा कर सकेंगे. ट्रेन पूरी तरह से एसी कोच वाली होती है. लेकिन सामान्य ट्रेनों की अपेक्षा इसका किराया कम होता है. कांग्रेस के अमृतसर के सांसद ने सवाल उठाया है कि यह शब्द गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है. सांसद ने संसद में रेल मंत्रालय से सवाल में पूछा कि क्या सरकार इस नाम को लेकर बढ़ती आपत्तियों से अवगत है? और क्या इसे बदलने की कोई योजना है? उन्होंने पूछा क्या ऐसी कोई योजना है कि इस ट्रेन का नाम बदला जाए ताकि यह सशक्तिकरण और राष्ट्रीय गौरव जैसे मूल्यों को प्रतिबिंबित बन सके.
     
    साल 2006 में सस्ती वातानुकूलित ट्रेन 'गरीब रथ' की शुरुआत की गई थी
     
    भारतीय रेलवे की ओर से साल 2006 में सस्ती वातानुकूलित ट्रेन 'गरीब रथ' की शुरुआत की गई थी. इसे तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने शुरू करवाया था. पहली 'गरीब रथ' एक्सप्रेस का संचालन सहरसा, बिहार से अमृतसर, पंजाब के बीच शुरू हुआ था. बाद में कई और रूटों पर गरीब रथ एक्सप्रेस की शुरूआत की गई. इसके सभी कोच एसी थ्री-टियर होते हैं और इसका किराया भी अन्य ट्रेनों के 3AC कोचों की तुलना में कम रहता हैं. गरीब रथ ट्रेन के कोच में अन्य ट्रेनों के 3AC कोचों की तुलना में अधिक बर्थ (78 से 81) होते हैं. गरीब रथ आमतौर पर कुछ स्टॉप वाली लंबी दूरी की ट्रेनें होती हैं. इन ट्रेनों की औसत गति लगभग 81 किमी/घंटा है, जबकि इनकी अधिकतम गति 140 किमी/घंटा होती है. रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने खूब नाम कमाया था. 

    रेलमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद आईआईएम, अहमदाबाद में लेक्चर दिया था 

    रेलमंत्री के पद पर रहते हुए लालू प्रसाद ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद में गेस्ट फैक्लटी के रूप में क्लास लेने भी गए थे. लालू प्रसाद, विद्यार्थियों को प्रबंधन का ज्ञान देने अहमदाबाद पहुंचे थे और आईआईएम के करीब 70 विद्यार्थियों को अपने प्रबंधन का ज्ञान दिया था। छात्रों को रेल मंत्री लालू प्रसाद का जो जुमला सबसे ज़्यादा भाया वो था, "रेलवे देसी गाय नहीं, जर्सी (दुधारू नस्ल) गाय है."लालू प्रसाद ने अपने मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आईआईएम के प्रोफेसर जी रघुराम के आमंत्रण पर वहां गए थे.  लालू प्रसाद 2004 में रेलमंत्री बनने के बाद से मंत्रालय में हुई प्रगति के बारे में विद्यार्थियों से चर्चा की थी. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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