धनबाद में जन्मी पार्टी के कार्यक्रम में पढ़िए अनुशासन कैसे हुआ तार तार, कैसे सिर चढ़ कर बोला राजनीतिक दुर्गुण

    धनबाद में जन्मी पार्टी के कार्यक्रम में पढ़िए अनुशासन कैसे हुआ तार तार, कैसे सिर चढ़ कर बोला राजनीतिक दुर्गुण

    धनबाद ( DHANBAAD) : धनबाद में जन्मी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ,धनबाद में ही आपसी टकराव का सामना कर रही है .यह टकराव दूसरे दलों से नहीं बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के लोगों में ही है. विवाद सालों से चल रहा है. विवाद खत्म करने के लिए जिले में नई कमेटी बनाई गई. फिर भी विवाद खत्म नहीं हुआ है. मंगलवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला समिति की बैठक में जो दृश्य उत्पन्न हुए, वह अजीब थे. सदस्यता अभियान को लेकर जिला अध्यक्ष लक्की सोरेन और पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश टुडू आपस में भिड़ गए. भिड़ ऐसे गए कि स्थिति मारपीट तक की पहुंच गई. लेकिन वरीय नेताओं ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया.

    सदस्यता अभियान पर पूछा गया कारण

    पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश टुडू ने आरोप लगाया कि उनके साथ सदस्यता अभियान चलाने पर टुंडी के प्रखंड अध्यक्ष से कारण पूछा गया है. उनका यह भी आरोप था कि एक विशेष के इशारे पर उन्हें संगठन के काम करने में बाधा पहुंचाई जा रही है. जिलाध्यक्ष ने इसका विरोध करते हुए आपत्ति की. इस पर दोनों के बीच गरमा गरम बहस हुई. बैठक में विधायक मथुरा प्रसाद महतो भी मौजूद थे. अन्य नेता भी थे. झारखंड मुक्ति मोर्चा धनबाद जिला कमेटी में रमेश टुडू की अध्यक्षता में पूर्व में बनी कमिटी का विवाद खत्म कराने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा था. उस समय धनबाद जिला में दो समानांतर समितियां काम कर रही थी. एक कमेटी रमेश टुडू की थी तो दूसरी पवन महतो की .

    विवाद का असली कारण

    सालों तक यह कमेटी समानांतर चली लेकिन उसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने हस्तक्षेप किया और एक संचालन समिति का गठन किया. उस संचालन समिति की अनुशंसा पर नई कमेटी का गठन हुआ और लक्की सोरेन अध्यक्ष बनाए गए. मनु आलम सचिव हैं .लेकिन कमेटी बनने के बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है." हमारे पास अधिक जनाधार तो हम अधिक मजबूत" की लड़ाई से यह पार्टी धनबाद में जूझ रही है. चुनाव आने ही वाला है. ऐसी स्थिति में धनबाद में अगर पार्टी के लोग आपस में ही  लड़ते रहेंगे तो दूसरे दलों को तो लाभ मिलेगा ही. अन्य पार्टियों की तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं में भी राजनीति के दुर्गुण भर गए हैं. नतीजा है कि कोई किसी से डरने को तैयार नहीं है. सब खुद को ही जिला का बड़ा नेता मानने लगे हैं. और यही है विवाद का असली कारण है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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