देवघर के रजत मुखर्जी का अनोखा शौक, इनके पास दुर्लभ डाक टिकट से लेकर देशी-विदेशी सिक्कों का है संग्रह

    देवघर के रजत मुखर्जी का अनोखा शौक, इनके पास दुर्लभ डाक टिकट से लेकर देशी-विदेशी सिक्कों का है संग्रह

    देवघर (Deoghar):-बाबानगरी देवघर तो भोलेनाथ के दरबार के तौर पर देश दुनिया में मशहूर है.  लेकिन, शिव की नगरी में ही रजत मुखर्जी नाम के ऐसे शख्सियत रहते हैं. जिनकी एक अलग पहचान और रुतबा हैं. उनकी छवि ही उन्हें लोगों से अलग बनाती है. वे पर्यावरणविद,पक्षी विशेषज्ञ तो है ही इसके साथ ही डाक टिकट , विदेशी मुद्रा और सिक्कों का संग्रहक भी है. दुनिया के दुर्लभ से दुर्लभ डाक टिकट इनके पास मौजूद है.

    बेहद शालीन और शानदार शख्सियत के धनी रजत मुखर्जी का ये शौक एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि सालो इसे जमा करने में लग गए, अपनी आधा से अधिक जिदंगी निकाल दी. अब वे अहिस्ते-अहिस्ते उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुँच रहें है. लिहाजा, अपने धरोहर को सहेजने औऱ संरक्षित करने लिए सरकार से जगह मुहैय्या कराने की गुजारिश की है. उनके लिए खुशी की बात ये रही कि, उनकी ख्वाहिशों को पूरा करने की पहल जिले के उपायुक्त विशाल सागर ने शुरु कर दिया है. उनके इस बेशकीमती संग्रह को सहेजने और सरंक्षित करने का बीड़ा उठाया लिया है.

    एक डाक टिकट से इतिहास की होती है जानकारी

    कहा जाता है कि कोई भी देश,राज्य,सभ्यता, संस्कृति,कला,विज्ञान,जगह,स्थान के इतिहास की जानकारी महज एक डाक टिकट के जरिए जानी जा सकती है. यह एक बेहतरीन माध्यम है किसी की जानकारी उपलब्ध कराने का. हालांकि, इस इंटरनेट औऱ डिजिटल के जमाने में लोग डाक विभाग से वास्ता ज्यादा नहीं रख रहे हैं. ऐसे वक्त में देवघर के बिलासी निवासी रजत मुखर्जी का यह कदम लोगों के बीच प्रेरणा का काम करता है, जो एक नजीर की तरह है.

    100 से अधिक देशों के डाक टिकट

    रजत मुखर्जी पिछले 40 सालों से 100 से ज्यादा देशो के डाक टिकट जमा करते आ रहे है. जो आज के जमाने में मिलना तो मुश्किल हैं. इसके अलावा कई विदेशी सिक्के भी इनके पास है, जिसे दशकों से एक धरोहर और विरासत की तरह सहेजकर रखे हुए हैं. बेशुमार शख्सियत के धनी और दिलदार इंसान रजत मुखर्जी को प्रकृति और पशु-पक्षियों से बेपनाह प्यार है . इसी के चलते वो एक पर्यावरणविद भी है और पक्षी विशेषज्ञ भी है. इनके पास पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रजाति के पक्षियों का चित्र भी बनाया गया है. जिसकी प्रदर्शनी भी समय-समय पर लगायी जाती है. इनका मकसद लोगों के बीच प्रकृति से प्यार पैदा करना है, ताकि पर्यावरण के जरिए पशु -पक्षियों को संरक्षित किया जा सके. इनकी गुजारिश सिर्फ इतनी है कि, जिस धरोहर को सहजने में अपनी उम्र खपा दी, वो आगे आने वाले पीढ़ियों को इसके बारे में जानकारी दे सके, लिहाजा एक उचित मंच मिले, जहां वो अपनी धरोहर को बेफ्रिक सौंप सके और दुनिया को दिखा सके.

    देवघर डीसी ने की पहल

    रजत मुखर्जी के अरमान को देवघर के उपायुक्त विशाल सागर भी पूरा करने के लिए आगे आए हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि डीसी साहब खुद भी डाक टिकट संग्रहक है. उन्हें जब the news post के रिपोर्टर की तरफ से जानकारी दी गई, तो उन्होंने उत्सुकता से तुरंत रजत मुखर्जी से मिलने उनके घर पहुंच गए. डीसी साहब ने घंटो उनका दुर्लभ कलेक्शन को देखा ,जाना और समझा . मानों उनके बचपन  मुराद पूरी हो गयी हो. उपायुक्त विशाल सागर इतने खुश औऱ उत्सुक दिखे कि उन्होंने ये विश्वास ही नहीं हो रहा था कि, इतनी दुर्लभ चीजे उनकी आंखे निहार रही है. उन्होंने रजत मुखर्जी के ख्वाहिशों को पूरा करने के की बात कही और जिला प्रशासन की तरफ से इस दिशा में पहल भी शुरु कर दी है. 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जिला प्रशासन रजत मुखर्जी को सम्मानित भी करेगा. 

    रिपोर्ट- रितुराज सिन्हा


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