Railway News: राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों तक के लिए बेस किचन कैसे बन गई है आफत,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    Railway News: राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के यात्रियों तक के लिए बेस किचन कैसे बन गई है आफत,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद(DHANBAD):  आउट सोर्स बेस किचन रेलवे की साख पर बट्टा लगा रही है.यह कोई एक दिन की बात नहीं है.लगातार इसकी शिकायतें मिल रही है.नए प्रयोग में पैंट्री कार में तैयार होने वाले भोजन को बेस किचन के हवाले कर दिया गया है.रेलवे प्रयोग पर प्रयोग कर रहा है .

    प्रीमियम ट्रेन राजधानी में यात्रियों को मिल रहा बासी भोजन 

    इधर, प्रीमियम ट्रेन राजधानी जैसे यात्रियों को बासी भोजन मिल रहा है. इसकी शिकायत हुई है. शिकायत के बाद रेलवे के कान खड़े हुए हैं. दरअसल, राजधानी सहित अन्य प्रीमियम ट्रेनों के लिए पहले पैंट्री कार में ही भोजन तैयार किया जाता था. लेकिन रिसेंटली इसमें कई बदलाव कर दिए गए हैं. अब कई जगहों पर बने बेस किचन से ट्रेन में खाना दिया जाता है. यह बेस किचन आउटसोर्स किया गया है. निजी एजेंसियों को ठेके पर दिया गया है. यह बात भी सच है कि बेस किचन से तैयार खान की सप्लाई शुरू होने के बाद से ट्रेनों में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें बढ़ गई है. यात्री लगातार शिकायत करते हैं. कहते हैं की बेस किचन से मिलने वाला खाना कई बार खराब होता है.

    यात्रियों की शिकायत के बाद भी नहीं निकला समाधान 

    इधर, नई दिल्ली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस में तो मामला ऐसा हुआ है कि यात्रियों को कई घंटे तक भूखे रहना पड़ा. कुहासे की मार तो ट्रेनों पर पड़ रही है और उसका खामियाजा रेल यात्री भुगत रहे हैं. ट्रेन लेट हो और ऊपर से बासी भोजन मिले. तो फिर यात्रियों की क्या हाल होती होगी, यह तो कोई भूखा यात्री ही बता सकता है. बताया गया है कि 12302 नई दिल्ली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस में शनिवार और रविवार को यात्रियों को खराब भोजन बांटा गया. सब्जी खराब हो चुकी थी .चावल दाल के पैकेट से भी दुर्गंध आ रही थी. चावल ठीक से पका हुआ भी नहीं था. यात्रियों ने इसकी शिकायत ट्रेन में मौजूद पैंट्री कार के कर्मचारियों से की. लेकिन वह कुछ भी नहीं कर सका.

    यात्रियों की माने तो नई दिल्ली से 4 जनवरी को शाम में खुलने वाली राजधानी एक्सप्रेस रात लगभग 11 बजे खुली थी. देर रात को भोजन दिया गया. उसमें सब्जी खराब थी. अगली सुबह नाश्ते में दिया गया ब्रेड भी ठीक नहीं था. दोपहर का भोजन भी देर से दिया गया. चावल और दाल में दुर्गंध आ रही थी. यात्री उसे खा नहीं सके. यात्री हो हल्ला करने लगे. फिर भी कोई समाधान नहीं निकला. धनबाद पहुंचते पहुंचते ट्रेन 13 घंटे लेट हो चुकी थी. ट्रेन में दूसरा कोई वेंडर नहीं चलता. मजबूरी में यात्रियों को भूखे रहना पड़ा. हालांकि इसकी जानकारी अधिकारियों को मिल गई है.उसके बाद अब आगे क्या कार्रवाई होती है. यह देखने वाली बात है. रेलवे अपने बेस किचन के सिस्टम को बदलता है या यात्रियों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ती रहेगी. यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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