हुसैनाबाद में बदहाल स्वास्थ्य सुविधा! सूर्या का सवाल सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर क्यों मिल रही मौत?

    हुसैनाबाद में बदहाल स्वास्थ्य सुविधा! सूर्या का सवाल सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर क्यों मिल रही मौत?

    रांची(RANCHI): झारखंड में हाल के दिनों में स्वास्थ्य सुविधा पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है. झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स से लेकर अनुमंडल और प्रखण्ड स्तर के सरकारी अस्पताल खुद बीमार पड़ गए. अस्पताल में डॉक्टर नहीं है. मशीन है लेकिन जांच करने के लिए कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं है. ऑक्सीजन तक अस्पताल में नहीं है.ऐसे में हर दिन मरीज की जान जा रही है. एक ऐसा ही मामला हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल से सामने आया है.एक बच्चे की जान चली गई. इसके बाद अब सवाल फिर से वही उठने लगा. आखिर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर झारखंड को सिर्फ मौत मिल रही है.

    हुसैनाबाद में बच्चे की मौत पर भाजपा नेता सूर्या सिंह ने पूरे सिस्टम पर सवाल उठाया है. अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा है कि  “आखिर जब व्यवस्था मौन हो जाए… तब सवाल पूछना ज़रूरी हो जाता है। हुसैनाबाद में हुई एक बेहद मार्मिक दुर्घटना, जिसमें समय पर ऑक्सीजन और एम्बुलेंस न मिलने की वजह से कई कीमती जानें चली गईं, उसने दिल को भीतर तक झकझोर दिया।

    एक सवाल लगातार मन में उठ रहा है —जब सब कुछ था, तो ज़िंदगी क्यों नहीं बची? जब मेरे पिता श्री Kamlesh Kumar Singh  जी हरिहरगंज - हुसैनाबाद के विधायक थे, तब उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए, जिनमें शामिल थे. झारखंड का सबसे पहला ऑक्सीजन प्लांट हुसैनाबाद में स्थापित कराना. कोविड काल में दर्जनों ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर उपलब्ध कराना।ब्लड स्टोरेज यूनिट, PICU (बाल ICU), और ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन की व्यवस्था।और सबसे अहम — हाईटेक एम्बुलेंस की सुविधा, जिसमें जीवनरक्षक उपकरण लगे हुए थे।लेकिन आज दुर्भाग्य है कि ये सारी व्यवस्थाएं या तो बंद पड़ी हैं, या लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं।क्या किसी जनप्रतिनिधि के कार्यकाल के साथ ही व्यवस्थाएं भी समाप्त हो जाती हैं?क्या जनता की ज़िंदगी का मूल्य अब केवल कागज़ों पर बचा है?

    मैं इस हृदयविदारक हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।🙏पर साथ ही एक स्पष्ट और ठोस सवाल भी करता हूं — अगर सब कुछ था, तो फिर किसी माँ की गोद सूनी क्यों हुई?अब वक्त सिर्फ शोक मनाने का नहीं, बल्कि जवाब मांगने का भी हैं!”

    यह सवाल अब पूरा झारखंड पूछ रहा है. लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है. आखिर कैसे पूरी व्यवस्था फेल हुई है. जिससे अस्पताल में डॉक्टर नहीं है और इलाज के लिए मरीज भटक रहे है.     


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