हूल दिवस के बहाने संथाल परगना में तेज हुई राजनीति, भोगनाडीह में हेमंत तो दुमका में गरजे बाबूलाल

    हूल दिवस के बहाने संथाल परगना में तेज हुई राजनीति, भोगनाडीह में हेमंत तो दुमका में गरजे बाबूलाल

    दुमका(DUMKA):लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने के साथ ही तमाम राजनीतिक दल विधान सभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है. जमीन घोटाला मामले में जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद पूर्व सीएम हेमंत सोरेन भाजपा पर ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे है. किसी भी राजनीतिक दल के लिए संथाल परगना प्रमंडल की जनता के बीच अपनी बात रखने के लिए हूल दिवस से बेहतर मौका क्या हो सकता है? तभी तो एक तरफ जहां सीएम चंपाई सोरेन और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन साहेबगंज के भोगनाडीह में अपनी बातों को रखा वहीं पूर्व सीएम सह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने जनता के बीच अपनी बातों को रखने के लिए दुमका की धरती को चुना. 

    हूल दिवस के बहाने दुमका पहुचे बाबूलाल मरांडी ने पोखरा चौक पर स्थापित सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद रानीश्वर प्रखंड के दिगुली स्थित संताल काटा पोखर के लिए रवाना हो गया.संथाल काटा पोखर का इतिहास भी हूल विद्रोह से जुड़ा है.रवाना होने से पहले पोखरा चौक ओर उन्होंने मीडिया से बात की संथाल परगना में आदिवासियों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय की आवादी बढ़ रहा है.उन्होंने सरकार से एसआईटी गठित कर इसकी जांच की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी विधान सभा चुनाव के लिए हम काफी मजबूत हैं,  झारखंड मुक्ति मोर्चा को आटे दाल का भाव पता लगवा देंगे. 

    संथाल समुदाय की घट रही आवादी पर बाबूलाल ने जताई चिंता, सरकार से एसआईटी गठित कर जांच की मांग

    पोखरा चौक पर माल्यार्पण के बाद बाबुलाल मरांडी ने कहा कि सिदो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलो  और झानो के नेतृत्व में 1855 में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल विद्रोह किया गया था.हज़ारों लोगों ने अपना बलिदान दिया.इसी विद्रोह का परिणाम था कि संथाल परगना क्षेत्र अस्तित्व में आया,यहां पर एसपीटी (संथाल परगना टेनेंसी एक्ट) एक्ट लागू हुआ.आज हम उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प ले रहे हैं लेकिन दुख की बात है कि संथाल परगना में आदिवासियों की संख्या लगातार घट रही है.उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा बीजेपी का नहीं है बल्कि सरकार के जनगणना का आंकड़ा है. उन्होंने आंकड़े की प्रति लहराते हुए कहा कि 1951 में संथाल परगना में ट्राइबल की आबादी 44.67% था जो 2011 की जनसंख्या में घटकर 28.11% रह गया। वहीं  अल्पसंख्यक समुदाय की जनसंख्या 1951 में  सिर्फ 09% थी जो 2011 में  बढ़ कर 22.73% हो गई.


     सरकार एसआईटी गठित कर जांच की मांग

    बाबुलाल मरांडी ने कहा कि जिस तेजी से संथाल परगना में आदिवासियों की संख्या घट रही है. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले 25 वर्षों में जब देश अपनी आजादी का सौंवा वर्षगांठ मनाएगा, संथाल हूल के लगभग 200 वर्ष पूरे होंगे, उस वक्त तक संथाल क्षेत्र से आदिवासियों की संख्या विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएगी. ऐसा क्यों हो रहा है, यह काफी चिंता का विषय है.यह अलार्मिंग पोजीशन है.बाबुलाल मरांडी ने सरकार से मांग किया कि वह एसआईटी गठित कर इसकी जांच कराये ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके.

    आगामी विधानसभा चुनाव में झामुमो को पता लगेगा आटे - दाल का भाव

    बाबुलाल मराण्डी ने कहा कि झारखंड में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है. लोकसभा चुनाव 2024 में हमने राज्य की 14 में 09 सीट जीती है, जिसमें 50 विधानसभा सीट पर भाजपा आगे रही. मुख्यमंत्री समेत उनके मंत्रिमंडल में शामिल 07 लोग अपनी विधानसभा सीट को नहीं बचा पाए.इससे साफ है कि राज्य में भाजपा के प्रति रुझान है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन जो भी दावे करें पर आगामी विधानसभा चुनाव में झामुमो को आटे - दाल का भाव पता चल जाएगा

     

    रिपोर्टः पंचम झा


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