दूसरे धर्म को अपनाने वाले लोगों को जनजाति आरक्षण एवं सूची से बाहर करने की मांग, हाथों में तख्ती लेकर नगर भ्रमण पर निकले लोग , जानिए कहा का है मामला

    दूसरे धर्म को अपनाने वाले लोगों को जनजाति आरक्षण एवं सूची से बाहर करने की मांग, हाथों में तख्ती लेकर नगर भ्रमण पर निकले लोग , जानिए कहा का है मामला

    दुमका (DUMKA) : भारत मे आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसको लेकर सड़क से सदन तक बहस होता है। दुमका की सड़कें भी आज इसका गवाह बना लेकिन मुद्दा थोड़ा भिन्न था. जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले लोग हाथों में तख्ती लेकर नगर भ्रमण पर निकले. लोग डीलिस्टिंग यानी दूसरे धर्म को अपनाने वाले लोगों को जनजाति आरक्षण एवं सूची से बाहर करने की मांग कर रहे थे. सोनवाडंगाल मैदान में इसको लेकर जनसभा भी हुई जिसे कड़िया मुंडा सहित कई लोगों ने संबोधित किया.
     
    सड़कों पर गूंज रहे डिलिस्टिंग के नारे

    दुमका की सड़कों पर डिलिस्टिंग के नारे गूंज रहे थे. महारैली में सम्मिलित होने आए जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले लोग जब तख्तियों और लाउडस्पीकर के साथ नारे लगाते हुए नगर भ्रमण पे निकले तो तीन किलोमीटर लंबी कतार सिर्फ डिलिस्टिंग का नारा लगा रहा थी. पारंपरिक गाजे बाजे और अस्त्र शस्त्र के साथ रसिकपुर से निकली यात्रा टीन बाजार से वीर कुंवर सिंह चौक होते हुए विवेकानंद चौक तक पहुंची. जहां से पोखरा चौक स्थित सिद्धों कान्हु की मूर्ति से होते हुए  जन सैलाब सभास्थल पर पहुंच कर रैली में तब्दील हो गयी.  

    जनजाति समाज के साथ हो रहे अन्याय पर की बात

    मंच संचालन करते हुए इंग्लिश लाल मरांडी एवं कैलाश उरांव ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया. संजीव सिंघानिया ने स्वागत भाषण दिया. सुलेमान मुर्मू ने विषय प्रवेश करवाया तत्पश्चात संग्राम बेसरा ने डिलिस्टिंग के तकनीकी पक्षों पर विस्तार से बात रखते हुए डिलिस्टिंग के न्यायिक पक्ष रखते हुए जनजाति समाज के साथ हो रहे अन्याय पर बात की। नौकरी या संवैधानिक पद मिलने के बाद या आवेदन में जनजाति के रूप में आरक्षण का लाभ लेना अनुचित बताया. 

    डिलिस्टिंग की मांग में यह 214 वा आयोजन

    मुख्य वक्ता राजकिशोर हांसदा ने कहा की सारे देश में  हो रहे डिलिस्टिंग की मांग में यह 214 वा आयोजन है और हर जगह इसी प्रकार से भीड़ जमा हो रही है. उन्होंने आह्वान किया की अधिकार के लिए लड़ना पड़ेगा ,चीखना पड़ेगा ताकि आवाज दूर तक पहुंचाएं जा सके. सांसद सुनील सोरेन ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्मांतरित लोगो को वोट करना बंद करें. जिसने मांझी थान छोड़ दिया वो उसका सम्मान नहीं कर सकता. 

    गलत लोग ले रहे आरक्षण का लाभ

    वहीं कड़िया मुंडा ने बाबा कार्तिक उरांव के प्रयासों को फलीभूत करने का इसे सही समय करार देते हुए कहा कि देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी रैली में शामिल हुआ.  सारे देश में जागृति आ रही है और इस जन जागरण में भी देश के अन्य हिस्से में लोग अधिक जागृत हैं.   हमे अवसरों और संसाधनों से इरादतन वंचित किया गया है. आरक्षण का लाभ संवैधानिक तरीके से गलत लोग ले रहे हैं. संविधान रूढ़िवादियों को प्रश्रय देने का पक्षधर है, जिस धर्म में जाति की मान्यता ही नही है उसका धर्मावलंबी किसी जाति विशेष का कैसे हो सकता है. देर शाम तक चले इस महारैली को गुरुमाता रेखा हेंब्रम, राजू पूजहर, गंगा प्रसाद मुर्मू, गुरुबाबा तूनू मुर्मू, तथा धन्यवाद ज्ञापन मनोज हांसदा ने किया.


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