धनबाद के ओम प्रकाश ने JPSC की CDPO परीक्षा में पूरे झारखंड में हासिल किया 31वां रैंक, पढ़े संघर्ष, धैर्य और त्याग की एक प्रेरणादायक कहानी


धनबाद(DHANBAD):धनबाद जिले के पथराकुली क्षेत्र के रहने वाले ओम प्रकाश तिवारी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की सीडीपीओ परीक्षा में पूरे राज्य में 31वां रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे धनबाद जिले का नाम रोशन किया है. 10 जनवरी 2026 को जेपीएससी द्वारा घोषित परिणाम के बाद पथराकुली समेत आसपास के क्षेत्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है. ओम प्रकाश की इस सफलता को संघर्ष, धैर्य और पारिवारिक त्याग की एक प्रेरणादायक कहानी के रूप में देखा जा रहा है.ओम प्रकाश तिवारी को इस उपलब्धि के तहत झारखंड सरकार में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर नियुक्ति मिलने जा रही है. यह पद झारखंड राज्य सरकार के महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत आता है, जो समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
पढ़े संघर्ष, धैर्य और त्याग की एक प्रेरणादायक कहानी
ओम प्रकाश की सफलता के पीछे उनके परिवार, खासकर उनकी मां, नानी और तीन छोटी बहनों का अहम योगदान रहा है. कठिन आर्थिक हालात के बावजूद परिवार ने कभी भी ओम प्रकाश के सपनों को टूटने नहीं दिया.उनके पिता नैना तिवारी मजदूरी करने के साथ-साथ गाय का दूध बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते रहे और बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाते रहे.मां के देहांत के बाद परिवार की जिम्मेदारी और बढ़ गई, लेकिन तीनों बहनों ने अपने बड़े भाई के भविष्य के लिए खुद के सपनों को पीछे रखा उन्होंने धनबाद के पथराकुली फुटबॉल मैदान के पास एक छोटा सा कोचिंग संस्थान चलाया, जहां 8वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को पढ़ाया जाता है. इस कोचिंग के माध्यम से मिलने वाली सीमित आमदनी से न सिर्फ घर चला, बल्कि ओम प्रकाश की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रही.
इस तरह हासिल किया मुकाम
ओम प्रकाश तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा हाई स्कूल धनबाद से हुई, जहां उन्होंने प्रथम श्रेणी में 63 प्रतिशत अंक प्राप्त किए.इसके बाद उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज से आईएससी की पढ़ाई भी प्रथम श्रेणी में पूरी की.आगे चलकर उन्होंने मगध विश्वविद्यालय, गया से गणित ऑनर्स में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, वह भी प्रथम श्रेणी के साथ सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू कर यहां तक का सफर तय करना आसान नहीं था, लेकिन ओम प्रकाश ने कभी हार नहीं मानी.
बिहार पंचायत ऑडिट सर्विस में चयन पाकर अपनी दी है सेवा
बता दें कि जेपीएससी में 31वां रैंक ओम प्रकाश की पहली सफलता नहीं है. इससे पहले उन्होंने बीपीएससी 2023 के तहत बिहार पंचायत ऑडिट सर्विस में चयन पाकर अपनी सेवाएं दी है. इसके अलावा वे जेसीसी सीजीएल परीक्षा में सफल होकर बोकारो जिले के प्रमुख प्रखंड में श्रम परिवर्तन पदाधिकारी के रूप में कार्यरत रहे है.इतना ही नहीं, एसएससी सीजीएल परीक्षा में इन्होंने ऑल इंडिया में 59वां रैंक हासिल किया था. हालांकि, इस सफर में असफलताएं भी कम नहीं रही. उन्होंने कुल 7 मेंस परीक्षाएं लिखीं और 6 इंटरव्यू का सामना किया.वर्ष 2008 में एसबीआई क्लर्क परीक्षा में दस्तावेज सत्यापन तक पहुंचकर वह अयोग्य घोषित कर दिए गए थे.इसके अलावा कई बैंकिंग परीक्षाएं और चेन्नई में असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता देर से मिली.
कड़ी मेहनत का परिणाम
ओम प्रकाश तिवारी का मानना है कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेना चाहिए.उन्होंने कहा कि यूपीएससी या राज्य सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए कक्षा 6 से 12 तक की एनसीईआरटी किताबों को गंभीरता से पढ़ना और बार-बार रिवीजन करना बेहद जरूरी है. बहुत सारी किताबें जमा करने के बजाय सीमित और चयनित पुस्तकों पर फोकस करना चाहिए. राजनीति विज्ञान के लिए उन्होंने एम. लक्ष्मीकांत, डीडी बसु और सुभाष कश्यप की किताबों को नियमित पढ़ने की सलाह दी.
झारखंड का इतिहास विशेष रूप से पढ़ने पर जोर
वहीं, जेपीएससी परीक्षा के लिए झारखंड का इतिहास विशेष रूप से पढ़ने पर जोर दिया.उन्होंने उड़ान पब्लिकेशन और मनीष रंजन सर की पुस्तकों को बेहद उपयोगी बताया.वहीं, छोटी बहन रूपा कुमारी ने बताया कि तीनों बहनों ने अपनी पढ़ाई को विराम देकर कोचिंग संस्थान चलाया, ताकि बड़े भाई को आगे बढ़ने का मौका मिल सके.आज ओम प्रकाश की इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है उनकी कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और बार-बार की असफलताओं के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते है.
रिपोर्ट-नीरज कुमार
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