धनबाद में राष्ट्रीय महासचिव ने संभाली कमान: विधायक रागनि  सिंह पर भी पार्टी की नजर टेड़ी, अब आगे क्या?

    धनबाद में राष्ट्रीय महासचिव ने संभाली कमान: विधायक रागनि  सिंह पर भी पार्टी की नजर टेड़ी, अब आगे क्या?

    धनबाद(DHANBAD): कारण कई हो सकते हैं, लेकिन भाजपा ने धनबाद में सीट को प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है.  पूरी ताकत झोंक दी है.  अगर यह सीट बीजेपी से अगर फिसली , तो धनबाद से रांची और दिल्ली तक पार्टी की किरकिरी हो सकती है. चुनाव निर्दल  हो रहा है, लेकिन जिस हिसाब से भाजपा के नेता प्रचार कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि निर्दल चुनाव को भी पार्टी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है.  राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह अब धनबाद में प्रचार की कमान संभाल लिए  हैं.  घर-घर घूम कर वोट तो मांग ही रहे हैं, साथ ही  उन्होंने गुरुवार को धनबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की.  प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एलानिया  अंदाज में कहा कि जो लोग बीजेपी छोड़ते हैं, उनका अस्तित्व मिट जाता है. 

      उनका इशारा पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल और पूर्व विधायक संजीव सिंह की ओर था.  एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी  कह दिया कि झरिया विधायक रागिनी सिंह को भाजपा की हर बैठक, मीटिंग और चुनाव प्रचार में आना चाहिए, नहीं आ रही है तो गलत कर रही हैं.  उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा के सभी कार्यकर्ता एकजुट  हो जाए.  जाति -धर्म से ऊपर उठकर भाजपा के समर्थित उम्मीदवार को वोट करें।  हालांकि ,सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि अरुण सिंह ने भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह को चुनाव नहीं लड़ने को राजी करने की कोशिश की थी.  लेकिन ऐसा नहीं हुआ.  हो सकता है कि यह बात पार्टी गंभीरता से ले रही हो.   आज के प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के तमाम नेता थे.  सांसद थे, पूर्व सांसद थे, विधायक थे, पूर्व विधायक थे, महानगर जिला अध्यक्ष थे. 

     परपस  यही था कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को एकजुट  किया जाए और पार्टी समर्थित उम्मीदवार संजीव अग्रवाल को चुनाव जीता दिया जाए.  परिणाम तो 27 फरवरी को आएंगे।  दरअसल, धनबाद मेयर का चुनाव कई मायनो  में महत्वपूर्ण हो गया है.  भाजपा ने जब पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल को समर्थन नहीं किया, तो वह झामुमो  के पास चले गए और झामुमो  में भी दोनों हाथों से उन्हें लपक लिया।  झामुमो ने  नामांकन किये अपने उम्मीदवार की दावेदारी वापस करा  ली और शेखर अग्रवाल को समर्थन दे दिया।  कांग्रेस के उम्मीदवार शमशेर आलम भी मैदान में हैं.  बुधवार को कांग्रेस ने भी शमशेर आलम के पक्ष में अपना मेनिफेस्टो जारी किया और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि सब मिलकर चुनाव लड़े और शमशेर आलम को विजई बनाये। 

     इधर, सांसद ढुल्लू महतो  और पूर्व विधायक संजीव सिंह के बीच तीखी  बयानबाजी की भी कोयलांचल में खूब चर्चा है.  अरुण सिंह ने भी इशारा किया है कि पार्टी के बागी  उम्मीदवारों पर कार्रवाई हो सकती है.  हालांकि स्पष्ट उन्होंने कुछ नहीं कहा- कब करवाई होगी, क्या कार्रवाई होगी।  इस बात को वह टाल गए.  खैर, जो भी हो लेकिन धनबाद मेयर  की सीट कई नेताओं के लिए "काल"  बन सकती है.  अगर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीत गए, तब तो बल्ले बल्ले ,नहीं तो कार्रवाई का डंडा घूम सकता है.  उस दायरे में कौन-कौन लोग आएंगे , यह तो भविष्य में ही पता चलेगा।  लेकिन राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने गुरुवार को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई संदेश दे दिए. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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