सुख सुविधा छीनने के डर से ख़ौफ़ में झारखण्ड के मंत्री ! हर जुगत और चिरौरी आलाकमान से कर रहें नेता जी !

    सुख सुविधा छीनने के डर से ख़ौफ़ में झारखण्ड के मंत्री ! हर जुगत और चिरौरी आलाकमान से कर रहें नेता जी !

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):- सत्ता की ख्वाहिश लिए लोग सियासत में आते हैं. नेता अपने-अपने जुगाड़ के साथ-साथ अपनी बेहतरी के लिए हर जुगत और हाथ आजमाते हैं. दरअसल, सियासत का यही मिजाज होता है. इसमे तमाम रंग और  छंटा बिखेरते हुए दिखे जाएंगे . 

    किसे मिलेगा मंत्री का पोस्ट 

    मौजूदा वक्त में चंपई सोरेन मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, किसे मंत्री पद मिलेगा और किसे नहीं इसे लेकर जोरदार बैचेनी छाई हुई है. हेमंत सोरेन के जमीन घोटाले में इस्तीफे के बाद चंपई सोरेन मुख्यमंत्री बनें. उनकी सरकार में किन्हें मंत्री पद मिलेगा. इसे लेकर बहुत पहले से ही आकलन , अटकले और आशंकाएं फिजाओं में घूम रही है. 
    यहां तो इस चिज का सबसे ज्यादा डर उन नेताओं को सता रहा होगा, जो तत्कालीन हेमंत सरकर के दौरान मंत्री बने थे. अब उनकी कुर्सी रहेगी या फिर चली जाएगी, इसे लेकर माथापच्ची , चेहरे पर शिकन औऱ तमाम जुगत भिड़ाए हुए हैं . 
    जेएमएम में भी उठा पटक तेज हैं. लेकिन, सबसे ज्यादा तो कांग्रेस में चिरौरी हो रही है. विश्वास मत  हासिल करने के बाद सभी की ख्वाहिशे और आशाए जग जाहिर हो रहे थे. अंदर ही अंदर चर्चा चल रही थी कि दिल्ली दरबार तक लॉबिंग और सेटिंग की जा रही है. किसी को मंत्री पद में नाम चर्चा में न आने से भी नाराजगी है, तो कोई लगातार कोशिशे करने से हिचक नहीं रहे हैं . किसी तरह बस एकबार बात बन जाए 

    सुविधा सुख छीनने का डर  

    जिन लोगों ने मंत्री पद का सुख हेमंत सोरेन के कार्यकाल में भोगा औऱ अब चंपई में मिलेगा या नहीं इसे लेकर खौफ में जी रहे हैं. क्योंकि जो सुख-सुविधाएं और शक्ति मंत्री बनन के बाद मिलती है. ऐसे साधारण विधायक बनने से वो सहूलियत, सूख औऱ ताकत नहीं आती . 
    अब कांग्रेस में ही उदाहरण के तौर पर ले तो बन्ना गुप्ता स्वास्थ्य मंत्री थे, बादल पत्रलेख कृषि मंत्री थे , रामेस्वर उरांव वित्त मंत्री थे और आलमगीर आलम संसदीय कार्य मंत्री औऱ ग्रामिण विकास मंत्री थे. इसमे आलमगीर आलाम तो बन गये हैं.  लेकिन, बाकी तीन का मंत्री पद बरकरार रहेगा या नहीं अभी सस्पेंश बरकरार है. 
    लाजामी है कि अगर मंत्री पद नहीं मिलेगा, तो एक निराशा तो आयेगी ही. क्योंकि उसकी बात ही कुछ और होती है. कई  बार देखा गया है कि इससे इसका साइट इफेक्ट भी पार्टी में होता है. नाराजगी , गुस्सा औऱ गम के हमसाये में विधायक रहते हैं. 
    अगर समझा जाए को राजनीति में ये चिजे चलती रहती है औऱ चलते भी रहेगी, क्योंकि सियासत का यही स्वरुप है और यही इसका चाल, चलन, चरित्र और चेहरा है. 

     

     


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