बिचौलिए, आयोग या सरकार, आखिर JPSC परिणाम प्रकाशन की देरी के पीछे कौन है ज़िम्मेदार?

    बिचौलिए, आयोग या सरकार, आखिर JPSC परिणाम प्रकाशन की देरी के पीछे कौन है ज़िम्मेदार?

    रांची(RANCHI): JPSC के परीक्षा परिणामों में देरी को लेकर छात्रों के मन में आक्रोश है और आयोग के मन में क्या चल रहा है, यह कोई नहीं जानता. इतने धरने हुए, छात्र अनशन पर भी बैठे, JLKM, भाजयुमो और आजसू पार्टी के लोग भी इस धरने का हिस्सा बने, उसके बावजूद आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं आया. पर हद तो तब हो गई जब JLKM के सुप्रीमो और डुमरी विधायक जयराम महतो सहित JLKM उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो और परिणाम के इंतजार में बैठे छात्रों ने राज्यपाल का दरवाजा खटखटाया.
    राजभवन जाकर लोगों ने राज्यपाल से मुलाकात की थी और उन्हें बताया था कि किस तरह से परीक्षा परिणाम को लेकर छात्र JPSC कार्यालय के बाहर बैठने को मजबूर हैं. कार्यकाल के दौरान राज्यपाल से यह आग्रह भी किया गया था कि वे जल्द से जल्द JPSC परिणाम प्रकाशित करवाएं और आयोग को निर्देश दें. इस पर राज्यपाल ने भी सख्ती दिखाते हुए आयोग से बात की थी. इस दौरान राज्यपाल संतोष गंगवार ने न सिर्फ JPSC रिजल्ट के शीघ्र प्रकाशन के निर्देश दिए, बल्कि आयोग से परिणाम प्रकाशन में हो रही देरी का कारण भी पूछा था. आयोग ने भी राज्यपाल को आश्वासन दिया था कि वह जल्द से जल्द परिणाम प्रकाशित करेगा.
    लेकिन अभी तक छात्र बस इसी आस में बैठे हुए हैं कि JPSC परिणाम कब घोषित किया जाएगा. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर जब राज्यपाल तक ने रिजल्ट प्रकाशित करने के निर्देश दे दिए हैं और आयोग ने इसे मान भी लिया है, फिर यह देरी क्यों हो रही है? क्या सरकार की ओर से परिणाम प्रकाशित न करने का कोई दबाव है? या फिर यूं कहें कि झारखंड सरकार के दलालों द्वारा अभी तक सीट बांटने और बेचने की सेटिंग हो नहीं पाई है, जिसके कारण परिणाम प्रकाशन में देरी हो रही है. वैसे भी झारखंड में सरकारी नौकरी के लिए सीटों का बेचना और खरीदना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सेटिंग के माध्यम से बड़ी रकम लेकर सीटें बेची और खरीदी जाती रही हैं.

    अब कारण जो भी हो, पर सरकार, आयोग या किसी बिचौलिए की तना-तनी के कारण झारखंड के उन हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है जो यह सोचकर अपना घर-बार छोड़कर वर्षों से सिर्फ एक सरकारी नौकरी की आस में सब कुछ दांव पर लगा चुके हैं.परीक्षा हुए अब लगभग 11 महीने हो चुके हैं, फिर भी आयोग और सरकार की ओर से सिर्फ आश्वासन ही दिए जा रहे हैं. ऐसे में झारखंड के युवाओं को नौकरी कब मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, और झारखंड से बेरोजगारी कब खत्म होगी यह कहना बेहद मुश्किल है.


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