जिस देश में जन्मी उर्दूं, उसे वहीं से बेदखल करने को उतावली है गंदी राजनीति: एस अली


रांची (RANCHI): देश की आजादी में प्रमुख भूमिका निभाने वाली उर्दू के साथ आज हो रहा सौतेला व्यवहार चिंताजनक है. अपने ही देश में इस मीठी भाषा का जन्म हुआ, लेकिन गंदी राजनीति आज उसे ही बेदखल करने में लगी है. नारे लगाएंगे उर्दू में, शेर पढ़ेंगे उर्दू के, लेकिन उर्दू स्कूल से आजकल कुछ राजनेताओं को चिढ़ है. ये बातें आज आमया संगठन के अध्यक्ष एस अली ने एक परिचर्चा के दौरान कही.
उर्दू मामले पर राजभवन के समक्ष महाधरना 23 अगस्त को
संगठन के अध्यक्ष एस अली ने कहा कि बिहार के समय से ही उर्दू माध्यम के स्कूल वर्षों से संचालित हो रहे हैं. वहीं इन स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी और रविवार को विद्यालय का संचालन कि परम्परा रही है, सभी विद्यालयों में प्रार्थना होती है. मुम्बई हाईकोर्ट का वर्ष 2013 में आया फैसला है कि हाथ जोड़कर प्रार्थना करने के लिए किसी को बाध्य नही किया जा सकता. उर्दू स्कूलों में ठीक से पढ़ाई हो, टीचरों की बहाली हो इसपर कोई बात नहीं कर रहा है. अली ने बताया कि इन सभी सवालों को लेकर 23 अगस्त 2022 को राजभवन रांची सहित संथाल परगना एवं दूसरे प्रमंडल में धरना प्रदर्शन किया जाएगा.
बैठक में ये उठी मांग
- प्राथमिक विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के 3712 रिक्त पड़े पदों को स्नातक टेट उत्तीर्ण से भरा जाए.
+2 विधालयों में उर्दू शिक्षक के पद सृजित किये जाएं, हाई-स्कूल के बैकलाॅग उर्दू शिक्षकों के पदों को भरा जाए.
-प्रारम्भिक विधालयों में उर्दू लिपि में विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान की किताबें उपलब्ध कराई जाएं.
ये भी रहे बैठक में रहे शामिल
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार उर्दू और अल्पसंख्यक के प्रति उदासीन है ढाई वर्षों में भी 15 सुत्री कमिटी, वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम आदि का गठ़न नही किया गया है. मौके पर आमया संगठन के पदाधिकारी मो. फुरकान, लतीफ आलम, जियाउद्दीन अंसारी, इमरान अंसारी, नौशाद आलम, एकराम हुसैन, शाहिद अफरोज, मो. सईद, अरशद जिया, मो. जावेद , अब्दुल गफ्फार, अब्दुल बारीक, तहमीद अंसारी, ज़ियारत अंसारी, अफताब गद्दी, एकराम अंसारी, अफजल खान, मोईज अहमद, उमर साज़िद, अफसर अंसारी, डां. इकबाल, दानिश आय़ाज, वारिस अंसारी, अशजद रज़ा आदि शामिल थे.
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