झारखंड में डायन-बिसाही के आरोप में हर साल चली जाती है 35 जा'न, इसकी रोकथाम के लिए लोहरदगा में उठा क़दम


लोहरदगा (LOHARDAGA): झारखंड राज्य के ग्रामीण इलाकों में डायन-बिसाही एक बड़ी समस्या है. यहां महिलाओं को डायन या बिसाही बताकर किसी को मारने के पीछे मुख्य तौर पर कुछ वजहें सामने आती हैं, जैसे- जलन, स्वार्थ, जमीन हड़पने की साजिश या तांत्रिक-ओझा (अंधविश्वास) का चक्कर. ऐसे में लोहरदगा जिला प्रशासन ने एक अच्छी पहल की शुरुआत की. डीसी वाघमारे प्रसाद कृष्ण और डीडीसी गरिमा सिंह ने बुधवार को जिला मुख्यालय परिसर से संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर डायन बिसाही जागरूकता रथ रवाना किया. यह रथ जिला में भ्रमण कर ग्रामीणों को इस समाजिक सम्यस्या से बचाव और इसके रोक-थाम के लिए जागरूक करेगा.

जनजागरूकता ही अभियान का उद्द्श्य
मौके पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने कहा कि लोहरदगा जिला के सभी प्रखंड क्षेत्र में रिकार्ड किए गए ऑडियो के माध्यम से डायन बिसाही को लेकर जनजागरूकता फैलाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है. जिला क्षेत्र में डायन बिसाही के आ रहे मामलों को देखते हुए यह क़दम उठाया गया है. ताकि जनजागरूकता के माध्यम से डायन बिसाही से जुड़े मामलों को खत्म किया जा सकें.
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झारखंड में डायन-बिसाही के मामलों का आंकड़ा
पुलिस के आंकड़ो के अनुसार पिछले सात सालों में डायन-बिसाही के नाम पर झारखंड में हर साल औसतन 35 हत्याएं हुई हैं. अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में डायन बताकर 46 लोगों की हत्या हुई. साल 2016 में 39, 2017 में 42, 2018 में 25, 2019 में 27 और 2020 में 28 हत्याएं हुईं.
रिपोर्ट: लोहगदगा ब्यूरो
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