देवघर में लोगों की जान हुई सस्ती! शिविर में दवा दे रहे डॉक्टरों को नहीं है जानकारी, फिर भी धड़ल्ले से बांट रहे हैं दवाएं 

    देवघर में लोगों की जान हुई सस्ती! शिविर में दवा दे रहे डॉक्टरों को नहीं है जानकारी, फिर भी धड़ल्ले से बांट रहे हैं दवाएं 

    देवघर(DEOGHAR):जो चिकित्सक एलोपैथी चिकित्सा की जानकारी नहीं रखते वे मरीजों को धड़ल्ले से अंग्रेजी दवा का नाम और दवाई दे रहे हैं.इसे मरीजों की जान भी जा सकती है.हम बात कर रहे हैं देवीपुर सीएचसी में पदस्थापित आयुष चिकित्सक की.जिन्हें सिर्फ आयुर्वेद या होमेओपेथ की जानकारी है,ये चिकित्सक एलोपैथी के बारे में कुछ नही जानते है फिर भी ये मरीजों को एलोपैथी दवा दे रहे है.

    देवघर में स्वास्थ्य विभाग मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है

    इन दिनों झारखंड सरकार द्वारा राज्यव्यापी आपकी योजना, आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य है राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों को ऑन स्पॉट मिल सके. इसी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपना शिविर भी लगाया जाता है. ग्रामीण मरीज को देखकर चिकित्सक द्वारा इलाज किया जाता है.जरूरत के हिसाब से उसे दवा भी दिया जा रहा है,लेकिन देवघर में स्वास्थ्य विभाग मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है. 

    शिविर में चिकित्सा के नाम पर खानापूर्ति

    वहीं शिविर में खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं हो रहा है.हम बात कर रहे हैं डॉक्टर राजमंगल सिंह की जो देवीपुर सीएचसी में आयुष चिकित्सक के पद पर पदस्थापित है.इनका काम आयुर्वेद या होम्योपैथी पद्धति से इलाज कर दवाई देना है. यह डॉक्टर को इसके अलावा एलोपैथिक इलाज की कोई जानकारी नहीं है.ताजुब है यह डॉक्टर शिविर में धड़ल्ले से एलोपैथ पद्धति से मरीज का इलाज कर रहे हैं और अंग्रेजी दवा उन्हें दे रहे हैं.


    डॉक्टरों  ने भी माना कि उन्हे एलोपैथिक चिकित्सा के बारे में कोई जानकारी नहीं है 

    वहीं इन डॉक्टरों को पता नहीं है कि कौन दवाई किस बीमारी के लिए है,लेकिन इनके द्वारा मरीज को बेझिझक अंग्रेजी दवा दिया जा रहा है.किसी और बीमारी की दवा किसी और बीमारी के लिए अगर दे दिया जाता है, तो उससे मरीज की जान भी जा सकती है. इसे क्या कहें,स्वास्थ्य विभाग किस प्रकार से मरीज की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है, यह इसका जीता जागता उदाहरण है डॉक्टर भी स्वीकार करते हैं कि सीएचसी प्रभारी ने जबरदस्ती उन्हें इस काम के लिए लगा दिया है. उन्होने बताया कि इन्हें एलोपैथिक चिकित्सा के बारे में कोई जानकारी नहीं है, ना ही कोई दवा की भी जानकारी है.ऐसे में साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिविर में सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा है जो बहुत गंभीर मामला है.

    रिपोर्ट-रितुराज सिन्हा


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