धरती के सुरंग से निकल सियासत की सुरंग में मजदूर! क्रेडिट लेने की होड़, महज छह सौ रुपये के लिए जिंदगी दावं पर क्यों लगा रहे हैं झारखंडी युवा ?

    धरती के सुरंग से निकल सियासत की सुरंग में मजदूर! क्रेडिट लेने की होड़, महज छह सौ रुपये के लिए जिंदगी दावं पर क्यों लगा रहे हैं झारखंडी युवा ?

    रांची(RANCHI): झारखंड एक पिछड़ा राज्य है,यहां रोजगार के साधान काफी कम है. शायद यही कारण है कि राज्य से बाहर जाने वाली ट्रेनों में भेड़ बकरी के जैसा मजदूर दूसरे राज्य रोजगार की तलाश में निकल जाते है.राज्य से बाहर गए मजदूर किस हालत में रहते है इससे सियासत को कोई लेना देना नहीं है.हा सियासत मजदूरों के नाम पर राजनीति खूब करती है.कुछ ऐसा ही फिर एक बार रांची के एयरपोर्ट पर देखने को मिला.उतराखंड टनल हादसे के शिकार 15 मजदूर वापस रांची लाए गए.इस दौरान एयरपोर्ट पर सभी राजनीति दल के नेताओं का जमावड़ा लगा रहा.सभी एक दूसरे को नीचा दिखा कर बयानबाजी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.खूब ढ़ोल बज रहे थे हर तरफ नेता माला लेकर खड़े दिखे. इस बीच एक सवाल सभी के मन में था आखिर जितनी मेहनत मजदूरों के स्वागत में कर रहे है.अगर यह सभी दल के लोग मिल कर एक नीति बनाने पर जोर देते,तो मजदूर पलायन करने को मजबूर नहीं होते.

    मजदूरों पर राजनीति

    झारखंड 23 वर्षों का हो गया है,लेकिन आज भी रोजगार के कोई बेहतर साधान यहाँ नहीं है.राज्य में सभी दल की सरकार रही लेकिन किसी भी मजदूरों के हक में कोई कानून नहीं बनाया. जिससे सभी को रोजगार उनके राज्य में मिल सके.झारखंड सबसे अमीर राज्य होने के बावजूद पिछड़ेपन की मार झेल रहा है.आखिर दूसरे राज्य की तरह झारखंड तरक्की क्यों नहीं कर सका.इसका जवाब किसी के पास नहीं है.अगर बात भाजपा,कांग्रेस,झामुमो समेत अन्य दल की करें तो सभी सिर्फ एक दूसरे पर बयानबाजी कर रोजगार के सवाल पर बचते है.

    मजदूरों के मन में सवाल

    15 प्रवासी मजदूर वापस तो लौट गए,सभी खुश थे लेकिन एक सवाल और डर सभी के मन में था. वह सवाल यह है कि राज्य सरकार यहीं पर कोई व्यवस्था कर देती तो अच्छा रहता. अपने घर परिवार के साथ रह कर ज़िंदगी बिताते.यह सवाल सिर्फ 15 मजदूरों का नहीं है,जीतने भी मजदूरी करने राज्य से बाहर जाते है उनके परिवार के लोगों में एक डर रहता है.आखिर जब वह बाहर जाएगा तो किस तरह का काम मिलेगा.कुछ गलत हुआ तो फिर क्या होगा. सुनने वाले तो कोई है नहीं. ना ही मजदूरों के लिए कोई कानून राज्य में है. 

    कैसे रुकेगा मजदूरों का पलायन

    मजदूर के पलायन रोकने के सवाल पर सभी दल के नेताओं के पास कोई ठोस जवाब नहीं है. इस मामले में भाजपा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश से सवाल किया तो उनका कहना था की भाजपा शुरू से मजदूरों के हित में सघर्ष करती है.मजदूर को वाजिब हक मिले इसपर जोर देने का काम करते है. जैसे ही टनल में मजदूरों के फसने की खबर मिली इसपर काम शुरू किया गया.इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर से भी यही सवाल पूछा तो उनका मानना है कि राज्य में आने वाले दिनों में ऐसी नीति बनाई जाएगी. जिससे मजदूर कहां और किस कंपनी में जा रहे है इस पर पूरा ख्याल रखा जाएगा. साथ ही राज्य में ज्यादा से ज्यादा मज़दूर यही पर काम करें इसपर भी सरकार काम कर रही है.                                   


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