श्रावन विशेष: जानिए भोलेनाथ को क्यों चढ़ाया जाता है जल
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दुमका (DUMKA): झारखंड के दुमका जिला स्थित सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल बाबा बासुकीनाथ धाम में सावन की दूसरी सोमवारी पर बाबा भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. आस्था के लोटे में पवित्र गंगाजल लिए श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर खड़े रहे. बाबा का पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने अरघा के माध्यम से नागेश्वर जोतिर्लिंग का जलाभिषेक किया.
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जलाभिषेक से जुड़ी मान्यताएं
बाबा बासुकीनाथ धाम में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार दिखी. वैसे तो सावन के महीने में रोजाना बाबा बासुकीनाथ के दरबार में लाखों की संख्या में श्रद्धालु महादेव के ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक करते हैं. मगर सावन के सोमवारी का अपना ही एक विशेष महत्व है. मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय होता है, जिस वजह से इस माह के सोमवार का महत्व सबसे अधिक होता है. ऐसी भी मान्यता है कि समुद्र मथने के बाद जो विष निकला उसे भगवान शिव ने अपने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा थी, विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया. ताकि उन्हें राहत मिले. कहा जाता है कि यही कारण है कि सावन में भगवान शिव पर जल चढ़ाया जाता है.
रिपोर्ट: सुतिब्रो गोस्वामी, जरमुंडी/दुमका
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