कारगिल विजय दिवस विशेष: इस दिन की कहानी जान आपकी आंखें भी हो जाएंगी नम


टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : दिन 26 जुलाई, 1999. जगह भारत के लद्दाख़ राज्य का करगिल ज़िला. इस दिन पाकिस्तानी सैनिकों ने करगिल की ऊंची पहाड़ियों पर घुसपैठ करके अपने ठिकाने बना लिए. उन्हें वहां से खदेड़ने के लिए भारतीय सैनिकों ने बड़ी ही बहादूरी के साथ जंग की शुरुआत की. पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़े और पॉइंट 5140 को पाकिस्तानी कब्जे से मुक्त करवाया. लेकिन यह जंग आसान नहीं रही. इस दौरान भारतीय सेना ने अपने 562 जाबाज जवान गवा दिए. वहीं 1363 अन्य जवान घायल हुए थे. पाकिस्तानी सैनिकों की बात करें तो उनके 600 से ज्यादा सैनिक मारे गए, जबकि 1500 से अधिक घायल हुए थे.

कारगिल युद्ध के हर नायक को सम्मान
पॉइंट 5140 पर भारत की इस जीत को मनाने और कारगिल युद्ध के हर एक नायक के सम्मान में हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस मनाया जाता है. इस दिन कारगिल-सेक्टर और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भारत के प्रधान मंत्री इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हैं. आज के दिन पूरा राष्ट्र अपने युद्ध नायकों को याद कर रहा है. और कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है.

कारगिल युद्ध के हीरो
1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान भारत के हर सैनिक ने भारत को सलामत रखने की हर वो कोशिश की होगी, जो उस समय संभव रहा होगा. इस दौरान कई सैनिक ने भारत मां की सलामती के अपना भरपूर योगदान दिया. ऐसे में कई घरों का एकलौता चीराग बुझ गया, कई बच्चों के सिर से बाप का हाथ उठ गया, तो वहीं न जाने कितनी नई सुहागनों के सिर से सिंदुर धुल गए. बात अगर युद्ध के हीरो की करें तो ‘कैप्टन विक्रम बत्रा’ का नाम सबसे ऊंचा रहा. यह एक अकेले जवान थे जिन्होंने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों के पॉइंट 5140 पर अकेले जाकर पाकिस्तानी बंकर को ध्वस्त किया. इस रियल लाइफ हीरो पर मशहूर प्रडूसर और डायरेक्टर कारण जोहर ने 2022 में फिल्म भी बनाई, जिसका नाम रखा गया 'शेर शाह'.
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