होली के ठीक पहले बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून बहस के केंद्र में,क्या नीतीश कुमार मानेंगे?


TNP DESK- होली के ठीक पहले बिहार की राजनीति में शराबबंदी कानून एक बार बहस के केंद्र में है. विवाद की चिंगारी कई स्तरों पर उठी है. सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार अपने ही आदेश की समीक्षा करेंगे अथवा यह बहस आगे भी जारी रहेगी। बता दें कि बिहार में एनडीए सरकार की ऐतिहासिक वापसी के कुछ महीने बाद से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ही गठबंधन के सहयोगियों के दबाव में हैं. सहयोगी दलों ने शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग उठाई है. उनका तर्क है कि इस कानून की वजह से राज्य के 8 लाख से अधिक लोग कानूनी मुकदमों का सामना कर रहे हैं. हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कानून की समीक्षा का समर्थन किया है. उन्हें अन्य लोगों का भी समर्थन मिला है.
जीतन राम मांझी ने कहा है कि इस कानून के शिकार अधिकतर लोग वंचित वर्गों से हैं और इस नीति से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. गया में पत्रकारों से बात करते हुए बुधवार को जीतन राम मांझी ने कहा कि शराबबंदी से बिहार को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है. नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी तो हो नहीं रही है- होम डिलीवरी हो रही है. उन्होंने कहा की चिंता की बात यह है कि जहरीली शराब की खेप पहुंच रही है. इससे गरीबों की जान जा रही है. उन्होंने कहा कि शराबबंदी लागू होनी चाहिए, हालांकि इसके क्रियान्वयन में खामियां हैं. इसलिए इसकी समीक्षा होनी चाहिए। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक माधव आनंद ने भी शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी. इधर , जदयू इस मांग को बकवास बताते हुए कहा कि आम सहमति से यह नियम लागू किया गया था.
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी के बाद जनता का विश्वास बढ़ा है और महिलाएं विकास की राह पकड़ चुकी हैं. हालांकि सरकार के शराबबंदी के निर्णय पर प्रशांत किशोर का कहना है कि अगर यह इतना ही अच्छा है, तो इसे पूरे देश में लागू कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे देश में नहीं भी तो, कम से कम जहां भाजपा की सरकार है, इसे लागू कर देना चाहिए। उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार बनने पर शराबबंदी कुछ ही मिनट में खत्म कर देने का वादा किया था. यह अलग बात है कि बिहार में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
4+