झारखंड की मंईयां  सम्मान योजना : एक से एक फर्जीबाड़े के मामले पकड़ में आ रहे तो जाँच का दायरा भी बढ़ रहा !

    झारखंड की मंईयां  सम्मान योजना : एक से एक फर्जीबाड़े के मामले पकड़ में आ रहे तो जाँच का दायरा भी बढ़ रहा !

    धनबाद (DHANBAD) : अब तो झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़ियों की फेहरिश्त लंबी होती जा रही है. इसलिए जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है. झारखंड की इस महत्वाकांक्षी योजना में  बिहार- बंगाल के लोगों ने भी लाभ उठाया है. वैसे, झारखंड के बोकारो में बहुत पहले ही जब डीसी ने जांच की कार्रवाई शुरू कराई , तो पता चला था कि बंगाल की महिलाओं ने गलत तरीके से लाभ उठाने का प्रयास किया है. एक ही बैंक अकाउंट से कई बार आवेदन किये गए थे. इधर, धनबाद में अभी तक किसी भी तरह के फर्जीवाड़ी की सूचना नहीं है. अलबत्ता , मई महीने में   3,52,048 लाभुकों  को कुल  88 करोड़ एक  लाख ,बीस हज़ार  राशि का भुगतान हुआ है. यह भुगतान आधार आधारित  किया गया है.  राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई है.  धनबाद में भौतिक सत्यापन का काम भी तेजी से चल रहा है.  बताया गया है कि जिन लाभुकों  का सत्यापन लंबित है, वह अपने नजदीकी आंगनबाड़ी सेविका से संपर्क कर सत्यापन प्रपत्र प्राप्त करें और  प्रक्रिया पूरी करे.  जिसे उनको  लाभ मिल सके. 

    कई तरह की गड़बड़ियों का हुआ था खुलासा 

    इधर, इस योजना में अन्य जगह बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. झारखंड के गालूडीह थाना क्षेत्र में 172 गैर योग्य लाभुकों द्वारा जालसाजी कर योजना का लाभ उठाए जाने की पुष्टि हुई है. सूचना के मुताबिक एफआईआर  में कहा गया है कि योजना  केवल झारखंड की महिलाओं के लिए थी, लेकिन 39 लाभार्थी बिहार के किशनगंज और 133 पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के रहने वाली ने लाभ लिया है. इसके अलावा 12 लाभार्थियों के एड्रेस स्पष्ट नहीं है. फिर भी उन्हें लाभ दे दिया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह हुई कि 40 पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ लिए. इनमें 10 पुरुष बिहार और 30 पश्चिम बंगाल के है. आरोपियों ने आवेदन में फर्जी दस्तावेज लगाए और पति के नाम के कॉलम में भी पुरुषों का नाम दर्ज किया. बता दे कि बोकारो में तो रकम ट्रांसफर होने के पहले ही मामला पकड़ में आ गया था. जाँच के क्रम में  यह पता चला था  कि बैंक खाता इंडसइंड बैंक से संबंधित था .  यह सभी आवेदन राज्य के पलामू जिले एवं बिहार राज्य के किसनगंज स्थित सीएससी संचालक द्वारा किये गए  थे .  

    बोकारो में ऐसे  पकड़ाया था मामला 

    कुल तीन कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) द्वारा इन आवेदनों को अलग – अलग नाम से किया गया था , जिनका सीएससी आइडी क्रमशः 243621130028 (आपरेटर, वीएलई नाम – विक्कु कुमार रवि, पैरेंट आइडी नाम – उपेंद्र प्रसाद, मोबाइल सं. – 8873482243 – जिला पलामू), 542316220013 (मास्टर, वीएलई नाम – सुमित कुमार, पैरेंट आइडी नाम – सुमित कुमार, मोबाइल सं. – 9122397271 – जिला पलामू) एवं 423664770011 (मास्टर, वीएलई नाम – फरयाद आलम, पैरेंट आइडी नाम – फरयाद आलम, जिला – किसनगंज, बिहार) था.  सत्यापन क्रम में यह स्पष्ट हुआ था  कि बैंक खाता संख्या 100253493007, जिसके खाता धारक का नाम सुफनी खातुन है, पता – मोतिविट्टा, कांटी, झारगांव, उत्तर दिनाजपुर, राज्य- पश्चिम बंगाल था .  इस खाता का इस्तेमाल कुल 94 बार अलग – अलग नाम से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया गया था.  इस दौरान दर्ज राशन कार्ड का संख्या भी फर्जी अंकित था . बोकारो  जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने जांच के क्रम में इसकी पुष्टि  की थी. वहीं, सभी नामों के उप नाम में मुर्मू, हांसदा, मंडल शब्द जोड़ा गया था.  31 अक्टूबर एवं 01 नवंबर 2024 को एक ही साथ कई बार आवेदन किये गए थे . 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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