झारखंड टूट जाएगा, बनेगा एक और राज्य! हेमंत की सरकार हो जाएगी बेदखल, लोकसभा में क्यों उठी मांग 

    झारखंड टूट जाएगा, बनेगा एक और राज्य! हेमंत की सरकार हो जाएगी बेदखल, लोकसभा में क्यों उठी मांग 

    रांची(RANCHI): झारखंड के एक हिस्से को तोड़कर अलग राज्य बनाने की तैयारी चल रही है. अगर यह हिस्सा झारखंड से अलग होता है तो झारखंड आधा ही बचेगा. यहां की संस्कृति दूसरे राज्य में चली जाएगी. या यूं कह ले कि आधे आदिवासी झारखंड से दूसरे राज्य में शिफ्ट हो जाएंगे.  ऐसे में अब खूब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अलग राज्य की मांग और झारखंड में सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने की तैयारी करने की बात कौन कर रहा है.  क्या हेमंत को जो जनादेश मिला है उसे अब संविधान की ताकत के जरिए बेदखल कर दिया जाएगा और झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाएगा. 

    दरअसल, लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान झारखंड के एक बड़े हिस्से को झारखंड से अलग करके संथाल परगना को राज्य बनाने की मांग उठी थी.  उसके बाद विधानसभा और लोकसभा का चुनाव हुआ.  मामला कुछ दिनों के लिए शांत पड़ा.  लेकिन फिर जब लोकसभा का बजट सत्र शुरू हुआ.  झारखंड के दो हिस्से करने की बात शुरू हो गई.  उसके साथ ही हेमंत सरकार को बेदखल करने की चर्चा हुई.  

    प्रश्न काल के जरिए गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने गृह मंत्री और प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से मांग की है कि झारखंड में डेमोग्राफी बदल गई है.  आदिवासियों की संख्या घट गई और यह सब सरकार पुलिस प्रशासन के नाक के नीचे चल रहा है.  दुमका, पाकुड़, साहिबगंज, गोड्डा को अलग राज्य बना दिया जाए.  इसमें बिहार के एरिया किशनगंज और बंगाल के मुर्शिदाबाद को शामिल किया जाए.  

    इन इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठिए अड्डा मार कर बैठे हैं.  जिसे निकालना मुश्किल है. ऐसे में आखिरी रास्ता अलग राज्य बनाना है.  जिससे यहां के आदिवासियों की पहचान बच सके और घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें देश से बाहर निकाला जाए और उन पर कार्रवाई हो. निशिकांत दुबे की इस मांग से साफ़ हो रहा है कि उन्होंने हेमंत सरकार को निशाने पर लेते हुए ही केंद्र सरकार से मांग की है कि झारखंड को तोड़कर एक अलग राज्य और बना दीजिए और हेमंत की सरकार को बेदखल कर दीजिए. 

    इस बयान के बाद झारखंड में बवाल मचा हुआ है. झारखंड मुक्ति मोर्चा भाजपा को निशाने पर लेते हुए बोल रही है की भाजपा की मानसिकता क्या है. वह बीच-बीच में उजागर होती है. जब चुनाव में जनता ने इन्हें नकार दिया, सिरे से खारिज कर दिया उसके बाद भी राज्य को तोड़ने की बात कर रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा के रहते हुए कभी भी उनके मनसूबे पूरे नहीं होने वाले हैं.


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