Jharkhand Politics: मुख़्यमंत्रियो को हराने वालों की पीठ पर नीतीश कुमार का हाथ क्यों ,पढ़िए विस्तार से !

     Jharkhand Politics: मुख़्यमंत्रियो को हराने वालों की पीठ पर नीतीश कुमार का हाथ क्यों ,पढ़िए विस्तार से !

    धनबाद(DHANBAD) : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद कहा करते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की "आंत में दांत" है. उन्हें समझना बहुत कठिन है. कई मौकों पर ऐसा देखा भी गया है. 2024 में झारखंड में विधानसभा का चुनाव होने जा रहा है. ऐसे में नीतीश कुमार एक बार फिर झारखंड में पैर जमाने के लिए उपक्रम कर रहे है. उनके कई कदम चौंकाने वाले साबित हो रहे है. वैसे अभी तो जमशेदपुर पूर्वी सीट को लेकर ही नीतीश कुमार की अग्नि परीक्षा होगी कि वह गठबंधन का धर्म निभाएंगे या मित्र धर्म का पालन करेंगे. यह सब स्थितियां झारखंड के चर्चित विधायक सरयू राय को लेकर बन रही है. कहा जाता है कि सरयू राय राजनीति के माहिर खिलाडी है. उनका हर दांव सधा हुआ होता है. इधर, यह भी चर्चा तेज है कि झारखंड के मुख्य मंत्रियो  को हराने वाले नेताओं की भीड़ आखिर जदयू में ही क्यों शामिल हो रही है. 

    करिश्माई नेताओं की खोज में लगे हैं नीतीश कुमार 

    शायद  नीतीश कुमार झारखंड के उन नेताओं की खोज कर रहे हैं, जो अपने दम पर चुनाव की दिशा को बदल सकते हो. नीतीश कुमार ने पहले जमशेदपुर पूर्वी सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को हराने वाले सरयू राय को पार्टी में शामिल किया. इधर, फिर राजा पीटर जदयू में शामिल हुए है. राजा पीटर भी पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को चुनाव में परास्त कर चुके है. झारखंड के पूर्व मंत्री गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर सोमवार को जदयू में शामिल हो गए. 2009 में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को चुनाव में परास्त कर दिया था. उनकी इस सफलता ने उन्हें रातों-रात सुर्खियों में ला दिया था. इसके बाद शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था. राजा पीटर 2009 में जदयू की  टिकट पर चुनाव जीते थे.  2010 में झारखंड सरकार में मंत्री बने थे. चर्चा है कि तमाड़  सीट पर जदयू दावा कर राजा पीटर को चुनाव मैदान में उतर सकता है.  

    झारखंड में जदयू के पैर पसारने का मतलब साफ़ है 

    जो भी हो, लेकिन जदयू जिस तरह से झारखंड में अपनी गतिविधियों को प्रसार रहा है, उससे लगता है कि जदयू झारखंड में इस बार टारगेटेड चुनाव लड़ेगा.  सीटों के बंटवारे में भी पेंच  फंस  सकता है.  अभी तो सबसे अधिक बवाल जमशेदपुर पूर्वी सीट को लेकर मचा हुआ है.  भाजपा सरयू  राय को घेरने  में लगी हुई है, तो सरयू राय भी अड़े  हुए है.  सूत्र तो यह भी बताते हैं कि जदयू की नजर धनबाद के बाघमारा और टुंडी सीट पर भी है. धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो की भी बाघमारा  सीट पर नजर है.  अभी हाल ही में राजगंज में जदयू का बड़ा सम्मेलन हुआ था.

    बाघमारा -टुंडी पर भी जदयू की नजर 
     
    संदेश साफ था कि जदयू की नजर बाघमारा और टुंडी दोनों सीटों पर है. देखना दिलचस्प होगा कि जदयू को कितनी सीटें एनडीए कोटा से मिलती है. क्योंकि झारखंड में अभी कुड़मी समाज राजनीति का बोलबाला है. कांग्रेस ने इसी जाति के केशव महतो कमलेश को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. तो भाजपा भी कुड़मी जाति को लगातार प्रश्रय दे रही है. नीतीश कुमार की पार्टी भी झारखंड में इस समाज का पोषक रहेगी. इधर जयराम महतो भी झारखंड में बड़े फैक्टर बनकर उभरे है.  यही वजह है कि सभी दल कदम उठा रहे है. आजसू तो कुड़मी की पार्टी ही कही जाती है. एनडीए में आजसू भी रहेगी तो जदयू भी रहेगा. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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