Jharkhand:विधायक कल्पना सोरेन पर बड़ा दांव की तैयारी में झामुमो, क्यों लेंगी चंपई दादा की जगह, पढ़िए इस रिपोर्ट में

धनबाद(DHANBAD): विधायक कल्पना सोरेन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. जैसे-जैसे झामुमो केंद्रीय अधिवेशन की तिथि नजदीक आ रही है. चर्चाएं तेज होती जा रही है. झामुमो का 13 वां केंद्रीय महाअधिवेशन 14 और 15 अप्रैल को रांची में प्रस्तावित है. इस अधिवेशन को बड़ा रूप देने की कोशिश की जा रही है. वजह बताया जा रहा है कि 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ी सफलता मिली है. पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड में बड़े दल के रूप में उभरा है. इस सफलता के पीछे कल्पना सोरेन की बड़ी भूमिका गिनाई जाती है.
चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारक की भूमिका में थी
चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह उन्होंने स्टार प्रचारक की भूमिका निभाई, महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित किया, इसका लाभ पार्टी को निश्चित रूप से मिला . 2024 की जीत के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा का कद भी बड़ा हुआ है और अब यह पार्टी दूसरे राज्यों में भी अपना पैर फैलाने की लगातार कोशिश में है .केंद्रीय महाधिवेशन में सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. इसकी पूरी संभावना है. तैयारी की रूपरेखा बृहत है .
बिहार में चुनाव लड़ने की तैयारी में पार्टी
बिहार में अभी चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में झामुमो की योजना है कि वह बिहार में कम से कम झारखंड से सटे इलाकों के सात, आठ विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़े. उसकी योजना है कि अगर तीन-चार सीट भी मिल जाती है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. इसको लेकर पार्टी का संगठन पर भी बहुत जोर है. ऐसे में केंद्रीय महाधिवेशन को लेकर कल्पना सोरेन की भी खूब चर्चा हो रही है. हो सकता है कि पार्टी में कल्पना सोरेन चंपई दादा की जगह ले. चंपई सोरेन के झामुमो छोड़ने के बाद केंद्रीय उपाध्यक्ष का पद खाली है. यह भी हो सकता है कि महिलाओं में पार्टी का विश्वास बनाए रखने के लिए कल्पना सोरेन को महिला विंग की केंद्रीय अध्यक्ष बना दिया जाए.
बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी विधायक कल्पना सोरेन को
इतना तो तय है कि कल्पना सोरेन को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. जिम्मेदारी देना पार्टी की मजबूरी भी है. कारण है कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद जिस तरह से कल्पना सोरेन ने पार्टी की बागडोर को अपने हाथों में लेकर लोकसभा चुनाव में सफलता दिलाई, लोगों के बीच लोकप्रिय हुई ,उससे कहा जाने लगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को एक मजबूत नेत्री मिल गई है. विधानसभा चुनाव में भी उनकी सक्रियता अधिक थी. लगातार सभाएं कर रही थी. लोगों से कनेक्ट होने का उनका तरीका भी खूब पसंद किया गया. फिलहाल वह गिरिडीह जिले के गांडेय विधानसभा से विधायक हैं. लेकिन जन सरोकार के मुद्दों पर अपने सरकार को भी घेरने से परहेज नहीं करती हैं. कल्पना सोरेन को पार्टी क्या जिम्मेदारी देती है,इस पर अन्य दलों की भी नजर है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
4+