Jhariya Fire : PMO के निर्देश पर पहुंची अधिकारियो की टीम से विस्थापितों की एक ही चिरौरी --हमें रोजगार से कैसे जोड़ेंगे हुजूर !!

    Jhariya Fire : PMO के निर्देश पर पहुंची अधिकारियो की टीम से विस्थापितों की एक ही चिरौरी --हमें रोजगार से कैसे जोड़ेंगे हुजूर !!

    धनबाद (DHANBAD) : झरिया की भूमिगत आग और विस्थापन की समस्या पर प्रधानमंत्री कार्यालय की नजर है. इसके पहले भी पीएमओ के अधिकारी झरिया पहुंचे थे. फिर पीएमओ के निर्देश पर एक टीम झरिया पहुंची है. यह टीम विस्थापितों से जानने की कोशिश कर रही है कि उन्हें रोजगार से कैसे जोड़ा जाए. यह अलग बात है कि झरिया विस्थापन को लेकर संशोधित मास्टर प्लान की अभी तक मंजूरी नहीं मिली है. अधिकारियों की टीम बारीकी से इस बात की जांच कर रही है कि विस्थापितों को रोजगार से कैसे जोड़ा जाए. सोमवार को कई मंत्रालयों के अधिकारी दो दिवसीय दौरे पर धनबाद पहुंचे है. मास्टर प्लान पर भी अधिकारियों ने बीसीसीएल से जानकारी ली है. यह टीम झरिया पुनर्वास योजना के तहत विस्थापित हुए और होने वाले लोगों के रोजगार की संभावनाओं पर भी अपनी रिपोर्ट देगी.  

    बेलगडिया में बसे लोगों से भी भेंट की अधिकारियो की टीम 

    यह टीम झरिया पुनर्वास योजना के तहत बेलगडिया  में बसे लोगों से भी भेंट की. विस्थापित लोगों की मांग  है कि उनको  रोजगार उपलब्ध कराया जाए. कौशल विकास के तहत चल रहे प्रशिक्षण केन्द्रों का भी निरीक्षण किया. प्रशिक्षण ले रहे लोगों से भी जानकारी ली. टीम में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के अधिकारी भी है. टीम इस बात की भी तलाश कर रही है कि आसपास कोई उद्योग स्थापित करने से कितने रोजगार के साधन उपलब्ध हो सकते है.  उस पर भी रिपोर्ट दी जाएगी. बता दें कि  झरिया पुनर्वास पर पीएमओ की भी नजर है. यह भी कहना गलत नहीं होगा कि झरिया मास्टर प्लान तो अभी तक चू चू का मुरब्बा बना हुआ है. संशोधित झरिया मास्टर प्लान को अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है. संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत कुल 1.04  लाख प्रभावित इलाके में रहने वाले लोगों को पुनर्वासित किया जाना है. इनमें करीब 32,000 रैयत है और 72,000 के आसपास गैर रैयत है. रैयतों के पुनर्वास के लिए आर्थिक पैकेज तैयार कर लिया गया है. संशोधित प्लान को स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा. 

    झरिया की यह आग 1995 से ही दे रही खतरनाक संकेत 

    झरिया  की यह आग 1995 से ही संकेत दे रही है कि अब उसकी अनदेखी खतरनाक होगी. 1995 में झरिया चौथाई कुल्ही में पानी भरने जाने के दौरान युवती जमींदोज हो गई थी. 24 मई 2017 को इंदिरा चौक के पास बबलू खान और उसका बेटा रहीम जमीन में समा गए थे. इस घटना ने भी रांची से लेकर दिल्ली तक शोर मचाया ,लेकिन परिणाम निकला शून्य बटा सन्नाटा. 2006 में शिमला बहाल में खाना खा रही महिला जमीन में समा गई थी. 2020 में इंडस्ट्रीज कोलियरी में शौच के लिए जा रही महिला जमींदोज हो गई थी. फिर इधर 28 जुलाई 2023 को घनुड़ीह का रहने वाला परमेश्वर चौहान गोफ में चला गया. पहले तो बीसीसीएल प्रबंधन घटना से इंकार करता रहा लेकिन जब मांस जलने की दुर्गंध बाहर आने लगी तो झरिया सीओ की पहल पर NDRF की टीम को बुलाया गया. टीम ने कड़ी मेहनत कर 210 डिग्री तापमान के बीच से परमेश्वर चौहान के शव का अवशेष निकाला. 

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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