झरिया विधानसभा: अब मजदूर राजनीति में भी पढ़िए क्यों आमने -सामने होंगी पूर्णिमा नीरज सिंह और रागिनी सिंह

    झरिया विधानसभा: अब मजदूर राजनीति में भी पढ़िए क्यों आमने -सामने होंगी पूर्णिमा नीरज सिंह और रागिनी सिंह

    धनबाद(DHANBAD):   झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह अब कोयला मजदूर राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ गई है. मजदूर राजनीति में यह उनकी पहली इंट्री है. एक संगठन की वह अध्यक्ष बनी है. जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) की अध्यक्ष बनाई गई है. 2019 में कांग्रेस के टिकट पर झरिया से विधायक बनने के बाद भी कोयला मजदूर संगठन से वह दूरी बनाए रखी. हालांकि मजदूरों के हित के आंदोलन में हिस्सा निभाती रही. लेकिन अब वह सीधे तौर पर मजदूर राजनीति से जुड़ गई है. उनकी गोतनी  रागिनी सिंह तो पहले से ही मजदूर राजनीति से जुड़ी हुई है. चुनाव को देखते हुए झरिया विधायक ने भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दी  है ,तो रागिनी सिंह भी झरिया की राजनीति में सक्रिय है. रागिनी सिंह भाजपा में है तो पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस के साथ है. झरिया विधायक ने मजदूर संगठन से दूरी बनाए रखने के बाद क्यों मजदूर संगठन में रुचि दिखलाई है, इसके राजनीतिक मायने  भी हैं तो पारिवारिक भी.

    बच्चा बाबू का निधन 28 अगस्त को हो गया था.
     
     जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) को बनाने वाले बच्चा बाबू का निधन 28 अगस्त को हो गया था. उसके बाद यह पद खाली था. इधर, विधानसभा चुनाव भी नजदीक है. ऐसे में मजदूर संगठन की राजनीति किए बिना, झरिया में कोई विधायक बन नहीं सकता है. बच्चा बाबू थे, तो पूर्णिमा नीरज सिंह को पूरा सपोर्ट था. लेकिन उनके निधन के बाद कोयला मजदूरों के सपोर्ट के लिए यूनियन में शामिल होना शायद विधायक के लिए जरूरी भी हो गया था,  वैसे, हाल के दिनों में कई मौके पर मजदूर के हित की लड़ाई में पूर्णिमा नीरज सिंह आगे -आगे दिखी. एक आउटसोर्सिंग कंपनी में मजदूर की मौत के बाद रांची से वह सीधे देर रात को घटनास्थल पर पहुंची थी और मजदूर परिवार को 15 लाख  रुपए से अधिक मुआवजा भुगतान कराने  में बड़ी  भूमिका निभाई थी. 

    पहले से ही कुछ न कुछ मिल रहे थे संकेत 
     
    उस वक्त से ही कुछ ना कुछ संकेत मिलने लगे थे, लेकिन गुरुवार को यह  संकेत परिणाम में बदल गया और पूर्णिमा नीरज सिंह जनता मजदूर संघ (बच्चा गुट ) की अध्यक्ष बन गई है. 2019 के विधानसभा चुनाव में अब तक के संकेतों के मुताबिक उनकी गोतनी रागिनी सिंह भाजपा से चुनाव लड़ सकती हैं तो पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी. ऐसे में अब तक के चुनावी राजनीति में ही दोनों गोतनी  टकराती थी, लेकिन अब तो मजदूर राजनीति में भी दोनों गौतमी आमने-सामने  दिखेंगी, विधायक के  देवर अभिषेक सिंह को संघ के महामंत्री की जिम्मेवारी दी गई है. इस प्रकार पूर्णिमा नीरज सिंह संघ के तात्कालीन अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय का स्थान लेंगी, तो अभिषेक सिंह बच्चा सिंह (अब स्वर्गीय) का जगह लेंगे. यह निर्णय गुरुवार को बच्चा सिंह के आवास पर हुई बैठक में   लिया गया. 

    संगठन के विस्तार की भी होगी पहल 

    बैठक में संगठन विस्तार के साथ-साथ मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से उठाने और उसके समाधान पर जोर दिया गया. यह भी निर्णय हुआ कि पूर्व मंत्री बच्चा सिंह के श्रमिक हित में किए गए कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा .उनके संकल्प को पूरा किया जाएगा. संघ का पुनर्गठन कैसे किया जाए, इस पर कई दिनों तक मंथन हुआ. समर्थक और संघ से जुड़े लोगों की राय ली गई .अंत में यही निर्णय हुआ कि विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह को संघ का अध्यक्ष बनाया जाए और उसके अनुसार गुरुवार को निर्णय लिया गया. इसके साथ ही विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह अब मजदूर राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ गई हैं.

    इधर ,झरिया  की राजनीति में अपनी ताकत  बढ़ाने के लिए दोनों गोतनी में जबरदस्त प्रतिद्वंदिता चल रही है.लेकिन दोनों गोतनी एक दूसरे पर सीधा हमला बोलने से बचती रही है. रागिनी सिंह अपनी गतिविधियां बढ़ा  कर झरिया के लोगों का मन जीतना चाहती हैं, वही पूर्णिमा सिंह भी दूसरी  बार विधायक बनने का जी तोड़ प्रयास कर रही है. यह बात सही है कि चुनाव अब नजदीक है ,ऐसे में राजनीति भी गति पकड़ रही है. देखना है आगे -आगे होता है क्या.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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