Jamshedpur Encounter: क्यों कहा जा रहा कि सौ साल के शहर में पहली बार हुआ ऐसा मुठभेड़, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

धनबाद(DHANBAD): झारखंड के जमशेदपुर में लौह स्क्रैप की नीलामी को लेकर हमेशा से माफिया की नजर बनी रहती है. जमशेदपुर में बिहार के समय से ही अपराधियों का एनकाउंटर होता रहा है. स्क्रैप की नीलामी की वजह से जमशेदपुर का सम्पर्क बड़े -बड़े कारोबारियों से रहता है. लेकिन शायद यह पहली बार था, जब जमशेदपुर में दूसरे प्रदेश की पुलिस ने झारखंड पुलिस की मदद से एक कुख्यात शूटर का एनकाउंटर किया. झारखंड बनने के बाद भी कई एनकाउंटर हुए, लेकिन शनिवार 29 मार्च की रात यूपी एसटीएफ और झारखंड एटीएस ने जिस तरह से एनकाउंटर किया, उसकी चर्चा दूर तक है. कहा तो यह जाता है कि आज से लगभग 30 साल पहले जमशेदपुर में सबसे अधिक एनकाउंटर हुए थे.
एक एसपी के कार्यकाल में 8 से अधिक एनकाउंटर किए गए थे
एक एसपी के कार्यकाल में 8 से अधिक एनकाउंटर किए गए थे. उसे समय डॉक्टर अजय कुमार जमशेदपुर के नए एसपी बने थे. उस समय के एनकाउंटर में पुलिस को जनता का भी पूरा सहयोग मिला था. क्योंकि अपराधियों की करतूत से जमशेदपुर की जनता भी आजिज आ गई थी. यह दौर 1995 का रहा होगा. डॉक्टर अजय कुमार जब जमशेदपुर एसपी का कार्यभार संभाला तो लोहा माफिया की वहां समानांतर व्यवस्था चल रही थी. उसके बाद उन्होंने अपने ढंग से काम शुरू किया. फिर तो माफिया का एनकाउंटर शुरू हुआ. हालात यह हो गई कि अपराधी जमशेदपुर छोड़ दिए. बाद में अजय कुमार भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर टाटा स्टील में अधिकारी की नौकरी ज्वाइन की. लेकिन बहुत दिनों तक वह नौकरी में नहीं रहे और फिर राजनीति में आ गए. वैसे, जमशेदपुर में एनकाउंटर में मारे गए अपराधियों की सूची लंबी है.
अपराधियों में इस तरह पैदा किया गया था खौफ
कहा जाता है कि जमशेदपुर में जब भी एनकाउंटर होता है, तो डॉक्टर अजय कुमार का नाम लोग लेते है. एनकाउंटर क्या होता है, कैसे होता है, अपराधियों में खौफ कैसे पैदा किया जाता है, उनके कार्यकाल में लोगों को देखने को मिला. अपराधियों की पूरी सूची पुलिस के पास होती और उसके बाद या तो अपराधियों को सरेंडर करने पर विवश कर दिया जाता या फिर उन्हें एनकाउंटर में मार दिया जाता था. डॉक्टर अजय कुमार 1994 से लेकर 1996 तक जमशेदपुर के एसपी रहे थे. अपराधियों के मन में उनके नाम का इतना खौफ था कि सभी भूमिगत हो गए थे. जमशेदपुर में डॉ अजय कुमार के कार्यभार ग्रहण करने के पहले स्क्रैप के कारोबार को लेकर हमेशा गैंगवार होते रहते थे. बाहर के अपराधी भी यहाँ आकर शरण लेते थे.
रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो
4+