IIT-ISM धनबाद पहुंची इसरो की ‘स्पेस ऑन व्हील्स’, छात्रों ने की अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक यात्रा

    IIT-ISM धनबाद पहुंची इसरो की ‘स्पेस ऑन व्हील्स’, छात्रों ने की अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक यात्रा

    धनबाद (DHANBAD): आईआईटी (आईएसएम) धनबाद का परिसर इन दिनों अंतरिक्ष विज्ञान के रंग में रंगा नजर आ रहा है. नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, हैदराबाद द्वारा संचालित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की चलंत प्रदर्शनी ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ बस आईआईटी आईएसएम कैंपस पहुंची है. इस प्रदर्शनी के जरिए छात्रों और आगंतुकों को भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिल रहा है.

    प्रदर्शनी बस के भीतर प्रवेश करते ही दर्शकों को ज्ञान की एक रोमांचक अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव होता है. यहां भारतीय प्रक्षेपण यानों के कार्यशील स्केल मॉडल, रॉकेट लॉन्च के सिमुलेशन और अंतरिक्ष तकनीक के विकास को दर्शाने वाले विस्तृत मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं. इसके साथ ही भारत के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े मॉडल और दृश्य भी लगाए गए हैं, जो युवाओं को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

    ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ केवल एक प्रदर्शनी बस नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों का चलता-फिरता संग्रहालय है. इसमें रॉकेट, उपग्रह और अंतरग्रहीय मिशनों को किताबों से बाहर निकालकर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है. आईआईटी धनबाद के छात्र, कर्मचारी और उनके परिजन इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे हैं. अन्य छात्र, पूर्व छात्र और आम आगंतुक 6 से 8 फरवरी तक इसका भ्रमण कर सकते हैं.

    प्रदर्शनी में पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा करने वाले उपग्रहों और पेलोड सिस्टम के मॉडल यह समझाते हैं कि उपग्रहों को कैसे डिजाइन किया जाता है और उन्हें सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाता है. क्रू एस्केप सिस्टम का मॉडल मानव अंतरिक्ष मिशनों में अपनाई जाने वाली सुरक्षा तकनीकों को दर्शाता है. वहीं रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के प्रदर्शन से यह बताया जा रहा है कि अंतरिक्ष तकनीक किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी है.

    इसरो के विशेषज्ञ छात्रों से सीधे संवाद कर डेमो, क्विज और चर्चाओं के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल भाषा में समझा रहे हैं. यह संवाद छात्रों की जिज्ञासा को नई प्रेरणा में बदल रहा है. सैटेलाइट इमेजरी के नमूने और इंटरएक्टिव डिस्प्ले के जरिए मौसम पूर्वानुमान, जलवायु अध्ययन, आपदा प्रबंधन, कृषि, वन मानचित्रण, जल संसाधन योजना, दूरसंचार, टेलीमेडिसिन, नागरिक उड्डयन और समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष डेटा के उपयोग को आसान तरीके से समझाया जा रहा है.

    शुरुआती उपग्रहों से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की यह प्रदर्शनी भारत की वैज्ञानिक प्रगति और अंतरिक्ष यात्रा की प्रेरक कहानी बयां करती है.

    रिपोर्ट : नीरज कुमार


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