धनबाद के झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार में छिड़ी है पावर की दिलचस्प लड़ाई, जानिए कैसे खोली जा रही है पोल पट्टी

    धनबाद के झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार में छिड़ी है पावर की दिलचस्प लड़ाई, जानिए कैसे खोली जा रही है पोल पट्टी

    धनबाद (DHANBAD): धनबाद के झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार, झामड़ा में अभी दिलचस्प लड़ाई चल रही है. यह लड़ाई पावर की है. हम पावरफुल तो हम ताकतवर की इस लड़ाई में अब तक हुए कार्यों की पोल पट्टी खोली जा रही है. कौन किस पर भारी पड़ेगा, यह कहना अभी मुश्किल है, लेकिन शिकायतों  का पुलिंदा लगातार ऊपर के अधिकारियों को भेजा जा रहा है. हाल ही में नया मामला सामने आया है जहां भुगतान के पूर्व तकनीकी सदस्य राम प्रकाश सिंह ने आरोप लगाया है. कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट कंपनी पर प्रबंधन मेहरबान है. साथ ही उन्होंने कहा कि 2 करोड़ 75 लाख रुपए का भुगतान गलत ढंग से करने का आरोप लगाया गया है. यह शिकायत धनबाद के उपायुक्त, नगर विकास विभाग एवं आवास विभाग के सचिव से की गई है.

    आरोप के मुताबिक राशि विचलन कर यह भुगतान किया गया है.  कार्यपालक अभियंता सह तत्कालीन तकनीकी सदस्य को दरकिनार कर राशि का भुगतान कर दिया गया है .इन दोनों पदों पर इंद्रेश शुक्ला कार्यरत थे. आरोप के मुताबिक वह 5 दिन की सीएल पर थे. सहायक अभियंता को कार्यपालक अभियंता का प्रभार दे दिया गया लेकिन उन्हें वित्तीय प्रभार नहीं मिला था. जिस दिन तकनीकी सदस्य योगदान करने वाले थे, उसके एक दिन पूर्व कंसलटेंट कंपनी को भुगतान कर दिया गया. भुगतान डी एम एफ टी फंड से करना था लेकिन बाजार फीस से भुगतान कर दिया गया. आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन एम डी दिलीप कुमार के पास भी कई बार भुगतान के लिए संचिका भेजी गई थी लेकिन उन्होंने लौटा दिया था. तत्कालीन एमडी ने भी भुगतान करने से मना कर दिया था.

    प्रभारी एमडी और सहायक अभियंता ने आरोप को बताया गलत

    झारखंड खनिज विकास प्राधिकार में 311 करोड़ की राशि से विकास कार्य की निगरानी कंसलटेंट कंपनी कर रही है. हालांकि प्रभारी एमडी और सहायक अभियंता ने इन आरोपों को गलत बताया है. प्रभारी एमडी का कहना है कि कंसलटेंट कंपनी को जो भुगतान किया गया है, उसमें डीएमएफटी फंड से लेना-देना नहीं था. परामर्शी को भुगतान उनके द्वारा प्राप्त  विपत्र और इकरारनामा की शर्तों के अनुरूप किया गया है. इसका जवाब नगर विकास विभाग को भेज दिया गया है. बहरहाल, झारखंड खनिज विकास प्राधिकार में अभी अधिकारियों के बीच ठनी हुई है. चर्चा यह भी है कि तत्कालीन तकनीकी सचिव से पावर छीन लिया गया है. विभाग से दी गई गाड़ी भी वापस ले ली गई है. इसके बाद से यह हालात पैदा हुए हैं .देखना होगा यह  लड़ाई किस जगह पर जाकर थमती है.


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