धनबाद जिला झामुमो कमेटी में अध्यक्ष और सचिव दोनों को मिला इनाम, विस्तार होगी बड़ी चुनौती


धनबाद(DHANBAD): धनबाद जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा कमेटी की सोमवार को घोषणा हो गई. केंद्रीय नेता विनोद पांडे ने समिति की घोषणा कर दी है. पुरानी कमेटी का सूपड़ा साफ कर दिया गया है. पुरानी समिति के सिर्फ मुकेश सिंह ही उपाध्यक्ष बन पाए है. मुकेश सिंह पिछली कमेटी में भी उपाध्यक्ष थे. रमेश टुडू और टुंडी विधायक मथुरा महतो के रिश्तेदार पवन महतो को भी जगह नहीं मिली है. यहां तक कि उनके समर्थकों को भी नहीं पूछा गया है. अब पार्टी के विस्तार को लेकर भी समस्या बढ़ेगी, ऐसा झारखंड मुक्ति मोर्चा की राजनीति को जानने वाले पंडित बताते हैं. लक्खी सोरेन अध्यक्ष बने हैं जबकि गोविंदपुर के मनु आलम को सचिव बनाया गया है. लक्खी सोरेन निरसा के रहने वाले हैं जबकि मनु आलम गोविंदपुर के.
शहर नहीं, जीटी रोड के नेताओं पर भरोसा
मतलब शहर के नेताओं से अधिक जीटी रोड के नेताओं पर पार्टी आलाकमान ने भरोसा किया है. मनु आलम को बड़ा इनाम मिला है. जानकार बताते हैं कि 2015 में जब जिला परिषद का चुनाव हो रहा था, तो मनु आलम पर आरोप लगा कि वह भाजपा विधायक ढुल्लू महतो के खेमे में चले गए है. उस समय कथित ढुल्लू महतो के समर्थन से रोबिन गोराई धनबाद जिला परिषद अध्यक्ष बने. उस समय मनु आलम की पत्नी हसीना खातून उपाध्यक्ष बनी. 2015 में जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव को लेकर जबरदस्त खेमेबाजी हुई थी. एक खेमा दुर्योधन चौधरी(अब स्वर्गीय ) का सक्रिय था तो दूसरा खेमा रोबिन गोराई का.
रोबिन गोराई को विधायक ढुल्लू महतो का समर्थन था
रोबिन गोराई को विधायक ढुल्लू महतो का समर्थन था तो दुर्योधन चौधरी भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता माने जाते थे. लोग बताते हैं कि उस समय दुर्योधन चौधरी ने हेमंत सोरेन से भी मनु आलम को फोन करवा समर्थन देने को कहा लेकिन मनु आलम रोबिन खेमे से नहीं हिले. और उनकी पत्नी हसीना खातून उपाध्यक्ष बन गई. उसके बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर मनु आलम को झारखंड मुक्ति मोर्चा से बाहर कर दिया गया, लेकिन मनु आलम ने किसी दूसरे दल को ज्वाइन नहीं किया. इंतजार करते रहे ,2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा में लौटे. उसके बाद 2023 में सीधे उन्हें जिला कमेटी में सचिव का तोहफा मिल गया है. नई कमेटी को जल्द से जल्द पार्टी का विस्तार कर केंद्रीय नेतृत्व को इसकी सूचना देनी है. राजनीतिक पंडित बताते हैं कि पार्टी का विस्तार बहुत आसान नहीं होगा, विवाद होगा. चूंकि रमेश टुडू और पवन महतो का गुट भी चुप नहीं रहेगा. देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के विस्तार में किन-किन लोगों को जगह मिलती है. झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला समिति अध्यक्ष के रेस में धनबाद के बड़े-बड़े चेहरे शामिल थे. पार्टी ने पुराने कार्यकर्ता लक्खी सोरेन पर विश्वास जताया है. उन्हें कमान सौंप दी गई है. इससे पहले वह केंद्रीय कमेटी के सदस्य थे.
एक साल से चल रहे विवाद का खामियाजा पुरानी कमेटी को भुगतना पड़ा
झारखंड मुक्ति मोर्चा ,धनबाद जिला में पिछले एक साल से चल रहे विवाद का खामियाजा पुरानी कमेटी को भुगतना पड़ा है. चर्चा चल रही थी पुरानी कमेटी को लोगों को जगह मिलेगी लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. झारखंड मुक्ति मोर्चा की जन्मस्थली धनबाद में ही पार्टी में विवाद था. पुरानी कमेटी में रमेश टुडू अध्यक्ष जरूर थे लेकिन पवन महतो ने भी एक समानांतर कमेटी बना दी थी. नतीजा हुआ कि एक साल से धनबाद जिले में समानांतर कमेटियां काम कर रही थी. पवन महतो टुंडी विधायक मथुरा महतो के रिश्तेदार है. देखना होगा कि धनबाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा अब अपनी कद कैसे बढ़ाता है. फिलहाल सिर्फ टुंडी में ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक है. 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक सीट कांग्रेस के पास है. नई कमेटी के उपर 2024 के चुनाव में ताकत को बढ़ाना एक बड़ी चुनौती होगी. देखना है इस चुनौती का सामना नई कमेटी किस चतुराई से कर पाती है.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद
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