त्रिलोक दर्शन और बुरे कर्मों की कैसे मिलती है सजा, जानना है तो सावन के महीने में देवघर आइए

    त्रिलोक दर्शन और बुरे कर्मों की कैसे मिलती है सजा, जानना है तो सावन के महीने में देवघर आइए

    देवघर : पुराने जमाने में ऋषि-मुनि अपनी कठोर तपस्या से तीनों लोकों का दर्शन कर लेते थे. कलियुग में क्या कोई ऐसा है जो भूत, वर्तमान और भविष्य का द्रष्टा हो? लेकिन अगर आपको तीनों लोकों का दर्शन करना है तो सीधे देवघर चले आइए. सावन के महीने में शिवलोक परिसर में आपको स्वर्ग, नर्क और पाताल का काल्पनिक लेकिन सजीव नजारा देखने को मिलेगा. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से इनका बेहद खूबसूरती से चित्रण किया गया है. देवघर के कलाकारों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इसे इस तरह से दर्शाया कि ऐसा लगा मानो वाकई में तीनों लोकों का दर्शन कर लिया हो. इस त्रिलोक दर्शन का उद्घाटन जिला उपायुक्त विशाल सागर समेत अन्य अधिकारियों ने किया.

    एक छत के नीचे होंगे त्रिलोक का दर्शन

    देवघर में आयोजित हो रहे श्रावणी मेले में जनसंपर्क विभाग ने एक ऐसा कैंप लगाया है, जहां आपको त्रिलोक के दर्शन के साथ-साथ समुद्र मंथन की जानकारी भी मिलेगी, जो काल्पनिक है, लेकिन सजीव है. शिवलोक परिसर में लगाए गए कैंप में प्रवेश करते ही आपको भोलेनाथ के प्रिय नंदी के दर्शन होंगे. इसके बाद आपको पृथ्वी लोक के दर्शन होंगे, जहां आपको बाबा मंदिर और पार्वती मंदिर दिखेगा. इसके दाहिनी ओर स्वर्ग लोक का कैलाश पर्वत है, जहां भोलेनाथ पार्वती के साथ विराजमान हैं. जिसके नीचे शिवलिंग से जल निकल रहा है. इसके ठीक नीचे स्वर्ग लोक में विराजमान देवी-देवता मौजूद हैं. आप राजा भगीरथ द्वारा गंगा मैया को पृथ्वी पर लाने और इसे हरा-भरा रखने के प्रयासों को भी देख सकेंगे. पृथ्वी वासी और पूजा-अर्चना करने वाले लोग भी नजर आएंगे. नरक लोक में किस तरह से अपने जीवनकाल में किए गए बुरे कर्मों की सजा मिलती है, इसका भी बखूबी चित्रण किया गया है. नरक लोक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. नरक लोक को गुफा नुमा संरचना में बनाया गया है. जहां लोगों के मरने के बाद का लेखा-जोखा देखा जा सकता है. इस नरक लोक में प्रकाश, ध्वनि और कलात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन देखा जा सकता है. प्रकृति का भी सजीव चित्रण किया गया है. झारखंड के पेड़-पौधे, संस्कृति और त्योहारों को जीवंत रूप देने का प्रयास किया गया है.

    समुंद्र मंथन का कारण और निकले रत्नों को भी प्रदर्शित किया गया है

    पौराणिक कथाओं के अनुसार एक ऋषि के श्राप के कारण स्वर्ग धन, वैभव और समृद्धि से रहित हो गया था. जिसके बाद भगवान विष्णु ने दैत्यों को यह कहकर समुद्र मंथन करने का लालच दिया कि समुद्र मंथन से निकलने वाला अमृत उन्हें भी मिलेगा और वे अमर हो जाएंगे. जिसके बाद देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन शुरू किया. कहा जाता है कि यह मंथन सावन के महीने में किया गया था. समुद्र मंथन के दौरान हर सोमवार को एक के बाद एक रत्न प्राप्त हुए. रत्नों में विश्वश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, शंख, लक्ष्मी, पारिजात, चंद्रमा, अमृत आदि प्राप्त हुए. लेकिन इस दौरान जो विष निकला उसे भोलेनाथ ने पी लिया. श्रावणी मेले में आकर आप समुद्र मंथन की पूरी कहानी एक तस्वीर से जान सकते हैं.


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