ट्रायल अगर सफल हुआ तो धनबाद के SNMMCH में स्ट्रेचर, ट्रॉली और व्हीलचेयर की जगह ले सकते हैं टोटो,जानिए योजना का विस्तार 

    ट्रायल अगर सफल हुआ तो धनबाद के SNMMCH में स्ट्रेचर, ट्रॉली और व्हीलचेयर की जगह ले सकते हैं टोटो,जानिए योजना का विस्तार 

    धनबाद(DHANBAD): अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा और ट्रायल सफल हुआ तो अब धनबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SNMMCH में स्ट्रेचर, ट्रॉली और व्हीलचेयर कम लेकिन टोटो अधिक दिखेंगे. आश्चर्य में नहीं पढ़िए, ट्रायल की तैयारी की जा रही है. अगर टोटो सफल हुए तो अस्पताल मैनेजमेंट टोटो खरीद सकता है. यह टोटो अस्पताल में ट्राली और स्ट्रेचर की जगह लेंगे. इसका प्रयोग मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जाने के लिए किया जाएगा. तैयारी तो यह है कि इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. हालांकि अभी यह योजना ट्रायल के बाद ही जमीन पर उतरेगी. अगर ट्रायल सफल हुआ तो टोटो खरीदे जा सकते हैं .

    टोटो के जरिए मरीज को काफी कम वक्त में दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता 

    SNMMCH में फिलहाल मरीज को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जाने के लिए ट्रॉली, स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का प्रयोग होता है. शिफ्टिंग में वक्त भी अधिक लगता है. मैनेजमेंट का मानना है कि टोटो के जरिए मरीज को काफी कम वक्त में दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जा सकता है. इससे मरीज को परेशानी भी कम होगी  और समय भी कम लगेगा. टोटो केवल शिफ्टिंग के ही काम नहीं करेंगे ,बल्कि मरीजों की जांच  समेत अन्य वजहों से अस्पताल के भीतर कहीं लाने और ले जाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाएगा. अस्पताल कैंपस से पीजी ब्लॉक अथवा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की दूरी अधिक है. अगर मरीज को लाना ले जाना पड़े तो एंबुलेंस के सिवा कोई विकल्प नहीं है. इस हालत में टोटो सुविधाजनक हो सकते हैं. टोटो को अस्पताल के रैंप के जरिए ऊपरी तल तक ले जाया जा सकता है. रैंप पर टोटो सफल होंगे अथवा नहीं, यह तो ट्रायल से ही पता चलेगा लेकिन अगर ट्रायल सफल हो गया तो अस्पताल के भीतर अब टोटो दौड़ते नजर आएंगे. 

    जानिए टोटो खरीदने के पीछे क्या दिया गया तर्क 

    तर्क दिया जा रहा है कि टोटो में खर्च नहीं के बराबर है. बैटरी संचालित टोटो की खरीद में सिर्फ एक बार पैसा लगेगा. इसके बाद वह बिजली से चार्ज होगा. इसका मेंटेनेंस भी नहीं के बराबर है. प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा. खैर, जो भी हो लेकिन सरकारी संस्थानों में किसी भी सामानों की खरीद पर  विशेष दिलचस्पी दिखती है. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अभी चालू नहीं हुआ है. इसके साथ भी सरकार ने न्याय नहीं किया. बिल्डिंग बन गई है, कुछ मशीन भी आ गई है, लेकिन यह चालू नहीं हुआ है. धनबाद में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खुलेगा भी कि नहीं, इस पर अभी संशय बना हुआ है .लेकिन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की आड़ में टोटो खरीदने की योजना बननी शुरू हो गई है. इसे ही कहते हैं "गाछे कटहल, ओठे तेल".


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