झामुमो अगर बिहार में अकेले चुनाव लड़ गया तो झारखंड की सेहत पर क्या पड़ेगा असर ,क्या कोई नया समीकरण बनेगा, पढ़िए !

    झामुमो अगर बिहार में अकेले चुनाव लड़ गया तो झारखंड की सेहत पर क्या पड़ेगा असर ,क्या कोई नया समीकरण बनेगा, पढ़िए !

    धनबाद (DHANBAD) : तो क्या बिहार की वजह से झारखंड में गठबंधन टूट जाएगा? क्या राजद कोटे के मंत्री पर पहले संकट आएगा? क्या कांग्रेस कोटे के मंत्री भी लपेटे में आएंगे या फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा को बिहार में सीटें मिल जाएंगी. और फिर सब कुछ सामान्य हो जाएगा. आगे बात करने के पहले झारखंड में दलीय स्थिति जान लेनी चाहिए. 2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो को 34, कांग्रेस को 16, राजद  को चार, माले  को दो सीट मिली थी. जबकि भाजपा को 21, आजसू  को एक, जदयू को एक, लोजपा को एक सीट मिली थी. जेएलकेएम को भी एक सीट पर सफलता मिली थी. इस दलीय आधार पर अगर कांग्रेस और राजद से झामुमो का गठबंधन टूटा, तो क्या होगा? इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है.  

    क्या सचमुच कोई दल चाहेगा कि गठबंधन टूट जाए ?

    हालांकि सूत्र यह भी बताते हैं कि कोई भी दल यह नहीं चाहेगा कि गठबंधन टूट जाए. इधर, शनिवार को झामुमो ने राजद और कांग्रेस पर बिहार विधानसभा चुनाव में धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया.  पार्टी प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस वार्ता में कहा कि बार-बारआश्वासन देकर झामुमो को ठगा गया है. इस वजह से पार्टी कम से कम 6 और अधिक से अधिक 10 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. जिन छह सीटों पर लड़ने की बात कही गई है, उनमें चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती शामिल है. इनमें कटोरिया और मनिहारी अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीट  हैं ,जबकि पीरपैंती अनुसूचित जाति की सीट है. यह बात सच है कि राजद  को झारखंड में सम्मान मिला है. 2019 के विधानसभा चुनाव में राजद को 7 सीट  दी गई थी. जिनमे एकमात्र विजय उम्मीदवार सत्यानंद भोक्ता को 5 साल तक कैबिनेट मंत्री बनाए रखा गया था. 
     
    2024 के चुनाव में राजद  को झारखंड में छह सीट मिली थी 
     
    2024 के चुनाव में राजद को 6 सीट  दी गई, जिनमें चार उम्मीदवार जीते. फिलहाल एक महत्वपूर्ण विभाग के साथ कैबिनेट के मंत्री राजद कोटे से है. आपको बता दें कि झारखंड में मिली सफलता के बाद झामुमो अपना विस्तार करने की लगातार कोशिश कर रहा है. वह बंगाल में भी चुनाव लड़ सकता है. बिहार में तो चुनाव लड़ने की उसकी तैयारी है  ही.  लेकिन गठबंधन से सीट नहीं मिलने की वजह से झारखंड मुक्ति मोर्चा किसी कड़े फैसले की ओर आगे बढ़ गया है. देखना दिलचस्प होगा कि आगे-आगे होता है क्या?

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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