गुरु जी के मौन समर्थन के बाद भी आखिर दुमका से कैसे हार गई बड़ी बहु सीता सोरेन? जानिए भाजपा की हार की असली वजह

    गुरु जी के मौन समर्थन के बाद भी आखिर दुमका से कैसे हार गई बड़ी बहु सीता सोरेन? जानिए भाजपा की हार की असली वजह

    दुमका(DUMKA): झराखंड की सबसे हॉट सीट में शामिल दुमका के किले में झामुमो ने झण्डा बुलंद कर लिया है. दुमका की जनता ने अपना सांसद चुन लिया. झामुमो प्रत्याशी नलिन सोरेन 23648 मतों से चुनाव जीतने में सफल रहे. कांटे की टक्कर में भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन को पराजय का सामना करना पड़ा. इन सब के बीच चर्चा है कि आखिर सीता सोरेन चुनाव में कैसे हार गई. इनके हार के कई कारण है.   

    भाजपा का अंतर्कलह ने हराया सीता को

    दिसोम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी पुत्रवधू सीता सोरेन की हार के कई कारण सामने आ रहे हैं. कारणों को देखें तो भाजपा का अंतर्कलह हार का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. क्योंकि भाजपा लोकसभा चुनाव की घोषणा के पूर्व से ही दुमका में कई गुटों में बंटी थी. इस सब के बावजूद पार्टी आला कमान ने एक प्रयोग के तहत निवर्तमान सांसद सुनील सोरेन का टिकट काटकर पार्टी और परिवार से बगावत कर झमुमो छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली दिसोम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी पुत्रवधू सीता सोरेन को प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार दिया. लेकिन भाजपा का यह प्रयोग सफल नहीं हुआ. इससे भाजपा में गुटबाजी और बढ़ गई. जिसका नतीजा चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा.

    सीता सोरेन: तीर कमान या कमल निशान, उलझ गए मतदाता

    लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद सीता सोरेन का भाजपा ज्वाइन करना भी हार का कारण माना जा रहा है. अगर कुछ महीने पूर्व वह भाजपा ज्वाइन की होती तो परिणाम कुछ और हो सकता था. इसका वजह भी स्पष्ट है. लोगों की जेहन में सीता सोरेन का नाम आने पर जो छवि उभर कर सामने आती है वह दिसोम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी पुत्रवधू के रूप में है. संथाल समाज के लोगों में शिबू सोरेन का मतलब चुनाव चिन्ह तीर कमान होता है. भाजपा सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं तक यह बात पहुंचाने में विफल साबित रही की सीता सोरेन का चुनाव चिन्ह अब तीर कमान नहीं बल्कि कमल फूल है. यही वजह रही कि मतदाता दिसोम गुरु की बड़ी पुत्रवधू के रूप में सीता सोरेन को वोट देना तो चाहते थे लेकिन वैसे मतदाता जो चुनाव चिन्ह देखकर अपने मतों का प्रयोग करते हैं लगता है उन्होंने सीता सोरेन के नाम पर तीर कमान का बटन दबा दिया हो जिसका परिणाम सामने है.

    हेमंत सोरेन का जेल जाना भी बना सीता के हार का कारण

    चुनाव की घोषणा के ठीक पहले ईडी द्वारा कथित जमीन घोटाला में हेमंत सोरेन को जेल भेजा गया. दिसोम गुरु शिबू सोरेन और पूर्व मंत्री हेमंत सोरेन का संथाल समाज के लोगों में गहरी पैठ है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता. इंडिया गठबंधन के लोगों ने हेमंत सोरेन के जेल जाने को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हुए संथाल समाज के लोगों की भावना को उभारने का काम किया. खासकर कल्पना सोरेन का चुनावी सभा में हेमंत सोरेन को जेल भेजने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया गया. इससे संथाल समाज के मतदाताओं का रुझान तीर कमान के प्रति और बढ़ गया.

    व्यवहार कुशलता ने नलीन की जीत का राह किया आसान

    इन सब कारणों के बीच इतना जरूर है कि नलिन सोरेन की जीत में उनकी व्यवहार कुशलता का अहम योगदान रहा. लगातार 35 वर्षों से शिकारीपाड़ा क्षेत्र का विधायक रहने वाले नलिन सोरेन आज भी प्रतिदिन आम लोगों से मिलते हैं और आम लोग भी उन तक बड़ी आसानी से पहुंचते हैं. अपने व्यवहार से वो किसी को निराश नहीं करते. इसलिए दुमका लोकसभा क्षेत्र की जनता ने शिकारीपाड़ा विधानसभा से बाहर निकालते हुए नलीन सोरेन को दुमका लोकसभा क्षेत्र का सांसद बनाया.

    हार से भाजपा को सबक लेने की है जरूरत

     कारण कई और हैं. लेकिन इतना जरूर है कि इस हार से भाजपा को सबक लेने की जरूरत है. निश्चित रूप से पार्टी आला कमान भी इस हार की समीक्षा करेगी, क्योंकि चंद महीने बाद ही झारखंड विधानसभा चुनाव होना है.


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