हूल दिवस पर हेमंत का उलगुलन,कहा-जेल हो या फांसी, भाजपा को खत्म कर ही लेंगे चैन

    हूल दिवस पर हेमंत का उलगुलन,कहा-जेल हो या फांसी, भाजपा को खत्म कर ही लेंगे चैन

    रांची(RANCHI): हेमंत सोरेन ने जेल से निकलने के बाद आक्रामक रूप अख्तियार कर लिया है. राजनीतिक तौर पर भाजपा को खत्म करने का दावा खुले मंच से करते दिख रहे है .जेल से आते ही रांची में भाजपा को खुली चुनौती दी तो अब हूल दिवस पर हेमंत ने सिद्धों कान्हो,चाँद भैरव, फूलों-झानों के शहादत की धरती संथाल से विद्रोह का एलान कर दिया है. मंच से हेमंत ने संकल्प लिया कि जब तक पूरी तरह भाजपा को देश की सत्ता से खत्म नहीं कर लेंगे चैन से नहीं बैठेंगे. लोकसभा चुनाव मे आदिवासी मूलवासी ने वोट के जरिए करारा तमाचा मारा तो अब विधानसभा में साफ करने का मन बना लिया है.

    हेमंत सोरेन ने कहा की आदिवासी मूलवासी हक और अधिकार की हमेशा से आवाज उठाते रहे है. हमारे पूर्वजों ने 1855 में अंग्रेजों की गोलियों का जवाब तीर धनुष से दिया था और यह लोग हमें ईडी सीबीआई और आईटी से डराते हैं हम डरने वालों में से नहीं है. जब भी हक अधिकार की आवाज दबाने की कोशिश कोई करेगा उसके खिलाफ झारखंड का एक-एक आदिवासी खड़ा दिखेगा.  भाजपा आदिवासी-मूलवासी अल्पसंख्यक को देखना नहीं चाहती है.

    हमेशा पूंजीपतियों की बात करते हैं लेकिन शायद भाजपा के लोगों को मालूम नहीं है कि हमारे पूर्वज साहूकार के खिलाफ आंदोलन करते थे.  अंग्रेज़ों से आंख में आंख डालकर बात करते थे.  अब एक संकल्प हूल दिवस के दिन ले रहे हैं कि देश के कोने-कोने से भाजपा को जब तक साफ नहीं कर देंगे.  चैन से कोई नहीं बैठने वाला है. आदिवासियों के उत्थान के लिए राज्य सरकार काम कर रही है 2019 के चुनाव में जनता ने अपनी सरकार चुनी.  इसके बाद से ही भाजपा के लोग इसे गिराने की कोशिश में लग गए थे.  लेकिन एक चट्टानी एकता के साथ सरकार बनी है, भले उन्हें जेल जाना पड़ा लेकिन जनता का काम रुका नहीं.

    लोकसभा चुनाव में एक करारा तमाचा जनता ने भाजपा को दिया है.  पांच आदिवासी सीटों पर अपना परचम  लहरा दिया.  अब विधानसभा चुनाव भी नजदीक है, भाजपा को धूल चटाने का काम यहां की जनता करेगी.  हेमंत को भले जेल के अंदर कर दिया था अब बेल मिल गया है और बाहर आ गए लेकिन भाजपा के बड़े-बड़े नेता फिर से षड्यंत्र कर फ़साने की कोशिश में लग गए हैं. अब ऐसे लोगों का जवाब जनता देगी.   हेमंत ने यह भी कहा कि जेल और फांसी से आदिवासी मूलवासी नहीं डरता. हमारे पूर्वज बहुत जेल गए हैं, फांसी पर लटक गए हैं पुलिस की लाठियां खाई है हम डरने वालों में से नहीं है.  


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