BOKARO: सरकार के सेवक का सरकारी वेतन कम पड़ा तो करने लगे लाभुकों से वसूली, जानिए मामला


बोकारो (BOKARO): जिले के होसिर पश्चिमी पंचायत के पंचायत सचिव सलीम अंसारी का कारनामा ऐसा कि लोग सोचने पर मजबूर हो गए. होसिर पश्चिमी के पंचायत सचिव इन दिनों थोड़े बीमार चल रहे हैं. इसलिए उन्होंने अपनी जगह अपने बेटे को काम पर लगा दिया है. वो भी किसी अधिकारी के अनुमति के बिना. बेटा भी ऐसा तेज निकला कि वह पीएम आवास में जिओ टेक करने के लिए वरीय अधिकारियों के नाम पर लाभुकों से वसूली करने लगा. इधर लाभुक भी जब सुनें कि अधिकारी ने ही वसूली के लिए कहा है तो वे भी पैसे देने के लिए मजबूर हो गए.
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क्या कहते हैं सलीम अंसारी
जब द न्यूज पोस्ट ने मामले की पुष्टि करने के लिए सलीम अंसारी से फोन पर बातचीत की तो उन्होंने कहा कि “सरकार हमें पच्चीस से तीस हजार रुपये प्रत्येक महीने तनख्वाह देती है. अब महंगाई इतनी है कि इस छोटी सी तनख्वाह से हमारा गुजारा नहीं होता है तो क्या करें, घर से कार्यस्थल वाले पंचायत पर आने के लिए तेल लगता है, भाड़ा लगता है, तो ऐसे में लाभुकों से लिये गए पैसे से ही किसी तरह महंगाई में भरपाई कर पाता हूं. इन दिनों पीएम आवास के लिए जिओ टेक कराने का कार्य चल रहा है, इसलिए जिओ टेक करने के लिए लाभुकों से खर्चे के नाम पर थोड़े बहुत ले लेते हैं, तो इसमें गलत क्या है. सरकार ज्यादा तनख्वाह देती नहीं है, इसलिए तो ये सब करना पड़ता है”.
विकास पदाधिकारी मामले से किया इंकार
वहीं इस बारे में गोमिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी कपिल कुमार ने कहा कि इस बात की जानकारी मुझे नहीं है,फिर भी यह जांच का विषय है. जांच में यदि दोषी पाए जाते हैं, तो पंचायत सचिव पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा.
समझिए कि इनमें दोषी कौन है ??
सरकार - जो इन कर्मचारियों को कम तनख्वाह देती है, जिसके चलते इन्हें वसूली करने पड़ते हैं.
अधिकारी -जिनके नाम से ये लोग पैसे वसूलते हैं, और अधिकारी भी मौन रहते हैं.
कर्मचारी - जो कम तनख्वाह मिलने के कारण लाभुकों से पैसे वसूलते हैं.
लाभुक - जो अपने कार्य को बिना किसी झंझट के जल्दी कराने के लिए रिश्वतखोरों को पैसे देने पर मजबूर हो जाते हैं.
रिपोर्ट: संजय कुमार, बोकारो, गोमिया
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