Good News: बटन मशरूम से चमकी साहिबगंज की गरीब आदिवासी महिलाओं की किस्मत, पढ़ें कैसे हर महीने कर रही हैं आमदनी

    Good News: बटन मशरूम से चमकी साहिबगंज की गरीब आदिवासी महिलाओं की किस्मत, पढ़ें कैसे हर महीने कर रही हैं आमदनी

    साहिबगंज(SAHIBGANJ): सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह विधानसभा क्षेत्र में आने वाली साहिबगंज जिले में अब आदिवासी महिलाएं बटन मशरूम की उत्पादन कर अपना तकदीर ही नहीं लिख रही बल्कि अपने गाँव का भी नाम रोशन कर रही है, उनकी मेहनत के सामने अब गरीबी हार गई है.एक समूह बनाकर 9 से अधिक महिलाएं अपने घरों में ही मशरूम उत्पादन में लगी हैं.हर माह पांच हजार से अधिक आय कर रही हैं.इससे परिवार का अर्थतंत्र तो मजबूत हुआ ही है, वहीं आत्मसंतोष भी है कि अपने पैरों पर खड़ी हैं.

    बटन मशरूम से चमकी महिलाओं की किस्मत

    मशरूम उत्पादन में महिलाओं की ललक देख जिला कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम के बीज भी तैयार हो रहे हैं.पहले बीजों को दूसरे प्रदेशों से मंगाना पड़ता था.यहा ओएस्टर व बटन प्रजाति के मशरूम का उत्पादन अधिकतर होता है.खास बात ये है कि जब मशरूम को बाजार किसी वजह से नहीं मिलता तो महिलाएं कृषि विज्ञान केंद्र में पहुंचा देती हैं.वहां से मशरूम के एवज में इनको राशि मिल जाती है,क्योंकि इसकी बिक्री केंद्र से हो जाती है.वहीं मशरूम की खेती कर रही महिलाओं का कहना है कि मशरूम का उत्पादन काफी कम लागत पर होता है.हम लोग समूह के सभी गरीब महिलाएं मिलकर घर के किसी कमरे में ही तैयार कर लेते है,साथ ही साथ हमारे द्वारा तैयार की गई मशरूम की मांग भी खूब हो रही है.इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है,जो कुपोषण दूर करता है.कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा गरीब महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है.

    समुह बनाकर करती है मशरुम का उत्पादन

    एक समूह के नौ से अधिक महिलाओं ने उत्पादन शुरू भी कर दिया है और स्वावलंबी बन गई हैं.हर माह उनको अच्छी आय हो रही है.वर्ग फीट के कमरे में हर माह 60 किलो के आसपास मशरूम का उत्पादन हो जाता है.सामान्य तौर पर बाजार में दो सौ रुपये प्रति किलो की दर पर बिक जाता है. जीवन में भरे खुशियों के रंग-राजमहल प्रखंड पर स्तिथ छोटा कार्तिकडंगा गांव के वार्ड सदस्य व पंचायत समिति सदस्य सहित अन्य महिलाएं पहले घर पर सिर्फ घरेलू महिला बनकर ही कार्य करती थी,साथ मे खेती बाड़ी भी करती थी,जबकि उसमें इतनी आमदनी नहीं थी कि परिवार की ठीक से गुजर बसर हो सके.तब मशरूम उत्पादन में जुटीं,हर माह 6 से 7 हजार रुपये कमा रही है.

    परिवार की आर्थिक परेशानी हुई दूर

    जबकि छोटा कार्तिक डंगा के ही कुछ महिलाएं बहुत ही मुश्किल से अपना का भरण पोषण क रती थी,तो कुछ महिलाएं के पति अपने घर को छोड़कर देश के राजधानी दिल्ली,मुंबई,हैदरा बाद,कोलकत्ता,चेन्नई,कश्मीर जैसे महानगरों में रोजगार की तलाश गया हुआ है. इसके बावजूद भी जीवन में अंधेरा छाया हुआ रहता है.मशरू में उत्पादन से आत्मनिर्भर बन गई हैं. प्रत्येक माह पांच हजार से अधिक कमा लेती हैं.आगे ग्रुप समूह के महिलाओं का कहना है कि मशरूम से जिंदगी को खुशरंग बनाया है.आगे बताया कि अब परिवार की जिम्मेदारी भी हम लोगो के ऊपर आ गई.तब बटन मशरूम के उत्पादन ही हमारा सहारा है.

    रिपोर्ट-गोविंद ठाकुर


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