Ghatshila by Election: चंपाई सोरेन का कैसे राजनितिक भविष्य तय करेगा यह उपचुनाव, पढ़िए !

    Ghatshila by Election: चंपाई सोरेन का कैसे राजनितिक भविष्य तय करेगा यह उपचुनाव, पढ़िए !

    धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में 2024 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पहला उप चुनाव होने जा रहा है. शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला सीट खाली हुई है. घाटशिला सीट को लेकर सक्रियता बढ़ने लगी है. यह तय माना जा रहा है कि झामुमो इस सीट पर रामदास सोरेन के बेटे को टिकट देगा. लेकिन एनडीए में अभी कई तरह के कयास लगाए जा रहे है. यह बात भी सच है कि घाटशिला सीट पर एनडीए और महागठबंधन का टेस्ट भी होगा. चुनाव आयोग भी तैयारी शुरू कर दिया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि बिहार चुनाव के साथ ही घाटशिला में उपचुनाव होगा. घाटशिला उपचुनाव को सत्ता पक्ष और विपक्ष कदापि हल्के में नहीं लेगा. यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 

    झारखंड में 28 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है
     
    बता दें कि झारखंड के 81 विधानसभा सीट में से 28 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. 2024 के विधानसभा चुनाव में एकमात्र  सीट भाजपा को मिल पाई थी. घाटशिला सीट पर 2024 के चुनाव में रामदास सोरेन ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को 22,000 से भी अधिक मतों से हराया था.  इस बार चंपाई सोरेन के लिए बेटे को टिकट दिलाना भी एक तरह से चुनौती है. टिकट में भी पेंच फंस  सकता है. यह चुनाव चम्पाई सोरेन का राजनीतिक भविष्य भी तय करेगा. अगर बेटे को टिकट दिलाने में सफल नहीं हुए, तो किरकिरी होगी और अगर टिकट के बाद भी बेटे को जीत नहीं दिला पाए तो और किरकिरी होगी. वैसे भी भाजपा ने जिस सोच के साथ चम्पाई सोरेन को पार्टी में शामिल कराया था, उसका  लाभ कोल्हान में तो कम से कम भाजपा को नहीं मिला. 

    घाटशिला शीट झामुमो के लिए प्रतिष्ठा की सीट होगी 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन घाटशिला सीट जीतने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि घाटशिला सीट कई नेताओं की परीक्षा लेगा. घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में घाटशिला धालभूमगढ़ ,मुसाबनी के साथ-साथ गुडा बांध का आधा हिस्सा शामिल है. उत्तर में पश्चिम बंगाल और दक्षिण में ओडिशा की सीमा सटती  है.  यह बात 100 फीसदी सच है कि झारखंड के घाटशिला विधानसभा उपचुनाव का परिणाम चाहे जो भी आए, सरकार की सेहत पर उसका कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन इतना तो तय है कि एनडीए, महागठबंधन और जयराम महतो की पार्टी का एक बार फिर लिटमस टेस्ट होगा. यह बात भी उतना ही सच है कि आया राम-गया राम का खेल खूब चलेगा. जिसकी चर्चा तेज हो गई है.

    2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के रामदास सोरेन को 98,356 वोट मिले थे 
     
    2024 के विधानसभा चुनाव में झामुमो के रामदास सोरेन को 98,356 वोट मिले थे जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को 75,910 वोट मिले थे. जेएलकेएम के रामदास मुर्मू को 8,092 वोट प्राप्त हुए थे. मतलब कोल्हान के टाइगर चंपई सोरेन का जादू बिल्कुल नहीं चला था.  2009 में भी झामुमो के रामदास सोरेन घाटशिला सीट से जीते थे. 2014 में वह भाजपा के लक्ष्मण टुडू से हार गए थे. 2019 में रामदास सोरेन फिर विजई रहे. 2024 में भी वह चुनाव जीत गए. लक्ष्मण टुडू इलाके के बड़े नेता माने जाते है. 2024 में जब भाजपा ने बाबूलाल सोरेन को टिकट दे दिया, तो नाराज लक्ष्मण टुडू भाजपा छोड़कर झामुमो में चले गए. उन्हें भरोसा था कि पार्टी स्तर पर उन्हें कोई ना कोई सम्मान मिलेगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं. इस बीच एक दुखद घटना में रामदास सोरेन का निधन हो गया. उसके बाद घाटशिला में उपचुनाव हो रहा है.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  


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