गैंग्स ऑफ़ जामताड़ा : फोन उठाओगे तो लुट जाओगे, पढ़िए -कैसे आगे निकल गया है यहां का साइबर ठग गिरोह 

    गैंग्स ऑफ़ जामताड़ा : फोन उठाओगे तो लुट जाओगे, पढ़िए -कैसे आगे निकल गया है यहां का साइबर ठग गिरोह 

    धनबाद(DHANBAD) : अब तक झारखंड का कुख्यात जामताड़ा यह कह रहा था कि फोन उठाओगे, तो लुट जाओगे, लेकिन अब उन लोगों ने बड़ी तरकीब निकाल ली है. अभी तक तो यही जानकारी थी कि जामताड़ा में साइबर अपराधियों की पाठशाला चलती है. वहां से निकलकर अपराधी देश के विभिन्न हिस्सों में फैल गए है. जामताड़ा पुलिस को मिली एक बड़ी कामयाबी से यह खुलासा हुआ है कि अब तो यह ऐप भी बनाते है. बनाकर उसे बेचते हैं भी है. बता दें कि जामताड़ा पुलिस ने शनिवार को देश भर में 415 एफआईआर से जुड़े 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की. इस गिरोह पर 11 करोड रुपए से भी अधिक की ठगी करने का आरोप है. इनकी गिरफ्तारी नारायणपुर से शनिवार को की गई है. आरोपियों में पांच गिरिडीह एवं एक जामताड़ा के रहने वाले है.  

    बहुत पढ़ा-लिखा भी नहीं है यह गिरोह 

    यह बहुत अधिक पढ़े-लिखे नहीं है. लेकिन इनके दिमाग की दाद  देनी होगी. तरह-तरह के हथकंडे अपना कर यह ठगी का काम करते है. सूत्र बताते हैं कि पुलिस की जांच जब आगे बढ़ी तो एक ऐसा खुलासा हुआ, जिसे सुन-जानकर सभी लोग हैरानी में पड़ सकते है. इन अपराधियों की पढ़ाई दसवीं से 12वीं के बीच की है. लेकिन इनकी करतूत किसी के लिए भी अचंभित करने वाली है.  इन लोगों ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से पहले ऐप बनाना सीखा. इसके बाद खुद ही ऐप बनाकर बेचने लगे. जिससे कि वह पुलिस की नजर से बचे रहे. गिरोह के बारे में पता चला है कि यह डीके बॉस के नाम से ठगी करते है. 

    ऐप डाउनलोड होते ही डिवाइस का नियंत्रण बदल जाता है 
     
    बताया जाता है कि इन अपराधियों के बने ऐप को डाउनलोड करते ही डिवाइस का नियंत्रण उनके पास चला जाता है. इससे साइबर अपराधियों को मोबाइल में रखे बैंक अकाउंट, पासवर्ड, एटीएम कार्ड का नंबर सहित सभी जानकारी मिल जाती है.  इसके बाद वह असली खाताधारक से बगैर कुछ पूछे ही बैंक से पैसा निकालने में सक्षम हो जाते है. आरोपियों के पास से बड़ी रकम , 14 मोबाइल, 23 सिम कार्ड ,10 एटीएम कार्ड, लैपटॉप, दो चार पहिया वाहन, एक कैमरा, एक ड्रोन कैमरा बरामद किया गया है. इधर, अब तो साइबर अपराधियों की ठिठाई हद पार करने लगी है. पुलिस को भी कहने लगे है कि हम जामताड़ा वाले है, जो करना है कर लो. साइबर अपराधियों की करतूत से जो ठगे जाते है, वह तो संकट में होते  ही है, जिनका इस मामले में कोई लेना-देना नहीं होता, वह भी परेशानी में पड़ जाते है. दरअसल, दूसरे प्रदेशों की पुलिस के कहने पर उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया जाता है. फिर तो वह परेशानी तब तक झेलते रहते हैं, जब तक उनका खाता डिफ्रीज नहीं हो जाता.

    ताबड़तोड़ अरेस्टिंग के बावजूद नहीं थम रही गतिविधियां 
      
    इधर, पुलिस की ताबड़तोड़ अरेस्टिंग के बावजूद धनबाद सहित अन्य ज़िलों में साइबर अपराधियों की गतिविधियां कम नहीं हो रही है. अब तो साइबर अपराधी पुलिस वाले तक को कहते हैं कि वह जामताड़ा से बोल रहा है-जो जी में आए, कर लो. दरअसल, धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति से एक लाख की साइबर ठगी की गई. जानकारी होने पर वह व्यक्ति तुरंत थाना पंहुचा. उसने पुलिस को सारी बात बताई, ड्यूटी पर तैनात ओडी ऑफिसर से अपराधी से बात कराई तो दूसरी ओर से साइबर अपराधी ने पुलिस के अधिकारी को कहा कि हम जामताड़ा से बोल रहे हैं- जो भी करना है कर लो. साइबर ठगी के मामले में झारखंड  बदनाम होता जा रहा  है. दूसरे प्रदेश की पुलिस ताबड़तोड़ यहां पहुंच रही है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो   


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