बोकारो में नहीं थम रहा गजराज का आतंक, अब गोमिया में घूम रहा जंगली हाथियों का झुंड, दहशत में जी रहे ग्रामीण

    बोकारो में नहीं थम रहा गजराज का आतंक, अब गोमिया में घूम रहा जंगली हाथियों का झुंड, दहशत में जी रहे ग्रामीण

    गोमिया(Gomia):-बोकारो जिले में इन दिनों हाथियों का आतंक लगातार जारी है, शहरी हो या ग्रामीण इलाका जंगली हाथियों का झुंड तकरीबन 20 दिन से जगह-जगह घूम कर तबाही मचा रहा है.  नावाडीह के कंजकिरो, बेरमो औऱ बोकारो थर्मल के कई गांवों में घुसकर तबाही मचाई है. अभी गोमिया में भी 20 से 30 की संख्या में जंगली हाथियों का झुंड घूम-घूमकर उत्पात मचाकर दहशत बांट रहें हैं, जिसके चलते लोग का जीना हराम हो गया है . सबसे बड़ी आफत जंगलों के तराई में रहने वाले ग्रामीणों की है.

    परेशान हैं ग्रामीण  

    गोमिया के ग्रामीण पिछले कई दिनों से जंगली हाथियों के डर से आम आवाम रात से सो नहीं पा रहा हैं. रात जागकर उनकी जिंदगी कट रही है. क्योंकि रात के अंधरे में ही जंगली हाथी, घरों को तोड़ देते हैं, खेतों में लगे फसल को रौंद डालते हैं . घरों में घुसकर अनाज तक चट कर जाते हैं. लिहाजा, ऐसी हालत में लोग सुरक्षित जगह पर जाने को मजबूर हैं. वन विभाग भी इनके आगे मानों नतमस्तक स हो गया है. इनसे निपटने में कोई खास दिलचस्पी औऱ पहल कारगर साबित नहीं हो पा रही है. हाथियों के दल ने मुकेश उरांव, विगन उराव, चेतलाल मांझी,जुगेस महतो, प्रेम महतो, निर्मल भुइया,  उमेश कुमार महतो, होरिल महतो, मेघलाल महतो हिरमन महतो, तोखलाल रजवार, लालमोहन रजवार के घर को धराशायी कर दिया .

    जंगलों की कटाई बनीं मुख्य वजह

    जंगली हाथियों का उत्पात गोमिया में होने की वजह जंगलों को बेतहाशा कटाई करना है . लगातार कटाई से इन हाथियों के आशियाने पर ही संकट मंडरा गया है . जिसके चलते हाथियों का तांडव देखने को मिल रहा है. जो कम होने की बजाए लगातार बढ़ ही रही है. सबसे चिंता की बात तो ये है कि अवैध तरीके से जंगल में घुसकर पेड़ों की कटाई की जा रही है . अभी भी कई इलाकों में माफियाओं के द्वारा अवैध रुप से आरा मशीन का इस्तेमाल कर लड़कियों की कटाई और छिलाई की जा रही है. लगातार घटते जंगल गजराज के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है.

    बोकारों जिलों हाथियों का उत्पात

    पिछले तकरीबन बीस दिनों से हाथियों का दल विभिन्न गांव में रात के अंधेरे या फिर दिन के उजाले में ही घुसकर तबाही मचाते हैं. बताया जा रहा है कि हाथियों के झुंड में कुछ बच्चे भी शामिल हैं. जो घर में घुसकर तबाही मचाते हैं औऱ खेतों में लगी फसल को भी खा जा रहे हैं. इन्हें भगाने में वन विभाग और वन रक्षा दल के लोग भी खदेड़ने औऱ भगाने में खुद को असहाय महसूस कर रहें हैं.

    बेरमो के प्रसिद्ध मंदिर में तोड़फोड़ 

    कुछ दिन पहले कोयलांचल बेरमो से सटे कारो खदान के पास प्रसिद्ध तारा पीठ मंदिर में भी  हाथियों ने रात को उत्पात मचाया था. आधी रात को हाथियों ने शिव मंदिर के गेट को तोड़फोड़ की थी.हालांकि, गनीमत ये रही कि इस दौरान कोई वहां मौजूद नहीं था. लेकिन, अभी भी वहां डर के साये में लोग जीने को मजबूर हैं.

    आमूमन हर साल ये देखा गया है कि बरसात के महीने में जंगली हाथियों का झुंड विचरण करता है. अभी तक वन विभाग की ओर से ऐसी कोई तैयारी हाथियों को खदड़ने औऱ भगाने की नहीं दिखती है. इसी का नतीजा है कि हाथियों का दल लगातार बिना किसी डर के रिहायशी इलाकों औऱ गांवों में घुस जाते हैं. वन रक्षा दल भी इन्हें रोकने में नाकाम है. पटाखे फोड़ने और मशाल जलाने  बावजूद हाथियों का झुंड नहीं भाग रहा है. इस बार तो देखा जा रहा है कि गजराज का दल काफी आक्रमक और खतरनाक रुख अख्तियार किए हुए हैं. लिहाजा,  इस तेज बारिश के मौसम में लोग बारिश से तो परेशान हैं ही इसके साथ ही गजराज का डर भी इनके दिमाग में है.

    रिपोर्ट- संजय कुमार


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