एक झटके में गई चार लोगों की जान, 3 परिवार में छाया मातम

    एक झटके में गई चार लोगों की जान, 3 परिवार में छाया मातम

    दुमका(DUMKA): वर्ष 2025 की शुरुआत दुमका वासियों के लिए मनहूसियत भरी रही. शनिवार की शाम हुई भीषण सड़क हादसे में एक झटके में चार लोगों की जान चली गई, जबकि चार लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ रहे है.

    मसानजोर डैम में बोटिंग करते लोगों को कहां पता था कि सुरक्षित घर नहीं लौट पाएंगे
    इन तस्वीर में जो सर्किल में चेहरा है अब वो इस दुनिया में नहीं रहे. घटना से चंद घंटे पहले की यह तस्वीर है जब दुमका के कड़हलबिल निवासी संजय साह अपनी पत्नी, बेटा, बेटी और नोनीहाट के रहने वाले साढू के परिवार के सदस्यों के साथ मसानजोर डैम में बोटिंग कर रहे हैं. उस वक्त किसी को कहां पता था कि खिलखिलाता हुआ यह चेहरा इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगा. मसानजोर में पिकनिक मनाकर लौटते वक्त घर से महज 3 किलोमीटर दूर और और ट्रक की टक्कर में संजय, उसकी पत्नी पूनम और बेटी मुस्कान के साथ साथ ऑटो चालक की मौत हो गई, जबकि घटना में संजय का बेटा रौशन, उसके साढू की पत्नी सरिता देवी, बेटी लवली और नैंसी कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गए. एक झटके में 3 परिवार में मातम छा गया. 

    फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मची अफरा तफरी 

    शनिवार की शाम घटित यह घटना जंगल में आग की तरह फैल गई. घटना स्थल से लेकर फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक अफरा तफरी का माहौल बन गया. घटना स्थल पर ऑटो में फंसे लोगों को निकाल कर अस्पताल पहुंचाने में स्थानीय लोगों ने अहम भूमिका निभाई. फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिजनों के चीत्कार से दहल उठा.  एक साथ 4 शव को देखकर सभी की आंखे नम हो गई.

    पूर्व सांसद सुनील सोरेन ने अस्पताल पहुंच कर पीड़ित परिवार से की मुलाकात, सरकार से मुआवजा की मांग

    रविवार की सुबह पूर्व सांसद सुनील सोरेन पीजेएमसीएच पहुंच कर परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने परिजनों को सांत्वना दिया. घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सरकार से मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने की मांग की. शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में बिलंब होने पर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया.

    बिहार में शराबबंदी के बाद दुमका में बढ़ी सड़क दुर्घटना

    शनिवार की घटना के परिपेक्ष्य में बात करें तो निश्चित रूप से चालक की लापरवाही रही होगी. लापरवाही या तो ट्रक चालक की हो सकती है या फिर ऑटो चालक की भी हो सकती है. किसी एक की लापरवाही ने चार लोगों को मौत की आगोश में सुला दिया. हाल के वर्षों में दुमका जिला में सड़क दुर्घटना में वृद्धि हुई है और इसके पीछे बिहार में शराबबंदी का तर्क दिया जाता है. दुमका जिला बिहार से सटा हुआ है. बताया जाता है कि बिहार से वाहन लेकर दुमका में प्रवेश करते ही अधिकांश चालक शराब का सेवन कर लेते हैं, जिस वजह से  आए दिन दुर्घटना हो रही है और दुमका की सड़के रक्त रंजित हो रही है, लोग असमय काल के गाल में समा रहे है.

    सड़क सुरक्षा माह में प्रशासन को सख्त होने की है जरूरत

    वाहन चालकों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी से 31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा माह मनाया जाता है. दुमका में भी आए दिन परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मी के साथ सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य सड़कों पर उतर कर वाहन चालकों को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ा रहे हैं. गुलाब का फूल और माला पहना कर समझाया जा रहा है कि जीवन अनमोल है. लेकिन गांधीवादी तरीके से सुधार की गुंजाइश कम नजर आ रही है. जरूरत है सख्त कदम उठाने की, अन्यथा दुमका की सड़के रक्त रंजित होती रहेगी.

    ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित हो घटना स्थल, परिवहन विभाग ने NHAI को लिखा है पत्र

    बताया जा रहा है कि मुफस्सिल थाना के दासोरायडीह के पास जहां यह घटना घटी, वहां अक्सर दुर्घटना होती है. इस लिहाज से देखा जाए तो वह स्थल ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित होनी चाहिए. परिवहन विभाग के विश्वस्त सूत्रों की माने तो उस स्थल को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित करने के लिए परिवहन विभाग द्वारा कुछ दिन पूर्व एनएचएआई को पत्र लिखा गया है. चूंकि यह सड़क एनएचएआई के अधीन आता है इसलिए निर्णय एनएचएआई को लेना है. इस घटना के बाद जरूरत है एनएचएआई को गंभीरता दिखाने की ताकि भविष्य में उस स्थल पर घटना की पुनरावृति न हो. 

    रिपोर्ट: पंचम झा


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