पर्यावरण दिवस आज, हम ही वर्तमान हैं और भविष्य भी हमारे ही हाथों में है, क्या आज इसपर होगा मंथन 

    पर्यावरण दिवस आज, हम ही वर्तमान हैं और भविष्य भी हमारे ही हाथों में है, क्या आज इसपर होगा मंथन 

    धनबाद(DHANBAD): आज 5 जून 2023 है. हम ही वर्तमान हैं,हमारे ही हाथों में भविष्य है. आज के दिन पर्यावरण सुरक्षित रखने की बड़ी-बड़ी बातें होंगी. प्रदूषण खत्म करने का दावा किया जाएगा. वृक्षारोपण भी होंगे, लेकिन आज के बाद फिर कल भी पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता फैलाई जाएगी या नहीं ,यह कहना मुश्किल है.आज भी केवल औपचारिकता निभाई जाएगी या कुछ जमीनी बाते होंगी,यह पूरे विश्व के सामने बड़ा सवाल है. हालांकि अभी तक के अनुभव यही बताते हैं कि सिर्फ 5 जून को ही हम पर्यावरण बचाने की बात करते हैं.

    कैसे बचाएंगे पर्यावरण को 

    झारखंड में एक आंकड़े के मुताबिक 109.73 वर्ग किलोमीटर मीटर वन क्षेत्र की बढ़ोतरी हुई है लेकिन 10108 वर्ग किलोमीटर भूमि पेड़ विहीन हो गई है.  पेड़ों की लगातार कटाई हो रही है. ऐसे में वन भूमि क्षेत्रों में घने जंगल कम होते जा रहे हैं और प्रदूषण बढ़ रहा है. पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर झरिया में एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें बीमार बच्ची ने लोगों से अपील की कि प्रदूषण के खिलाफ बोलना शुरू करिए अंकल ,नहीं तो अन्य लोगों का भी हाल मेरी तरह ही हो सकता है. यह बहुत मार्मिक अपील है. लेकिन इसका असर कितना होगा, यह कहना बहुत मुश्किल है.

    लगातार बढ़ रहा प्रदूषण

    प्रदूषण को लेकर देश ही नहीं, विदेश में भी चिंताएं हैं. नियम, कायदे कानून तो बना दिए जाते हैं, सरकार कायदा कानून बनाकर अपने को निश्चित कर लेती है लेकिन वह कानून जमीन पर किस हद तक उतरा है इसकी कभी कोई जांच नहीं होती. प्लास्टिक पर पाबंदी इसका उदाहरण के रूप में गिना जा सकता है. पहले भी प्लास्टिक का प्रचलन था और आज भी है.  धनबाद कोयलांचल तो लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रहा है. कोयला उत्पादन के कारण यहां प्रदूषण भी अधिक होता है. फिलहाल कोयले का उत्पादन अब भूमिगत खदानों के बजाय पोखरिया खदानों से अधिक हो रहा है. नतीजा है कि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. ऐसी बात नहीं है कि सरकार या कोयला कंपनियों को इसकी जानकारी नहीं है, बावजूद प्रदूषण को नियंत्रित करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता.

    विकास के नाम पर काटे जा रहे पेड़ 

    अगर हम धनबाद की बात करें तो विकास के नाम पर 60 साल 80 साल पुराने वृक्षों को काट दिया गया, उनकी जगह पर फूल पत्ती वाले पौधे लगा दिए गए. इन पौधों से न प्रदूषण रुकेगा ना पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी. फिर ऐसे पौधों को लगाने का फायदा क्या है .प्रदूषण के कारण पर्यावरण भी बिगड़ रहा है ,नतीजा मौसम पर असर पड़ रहा है.आज 5 जून को अमूमन बारिश होती थी .लोग पेड़ पौधे लगाते थे लेकिन आज जिस हिसाब से गर्मी है, ऐसे में पेड़ पौधे अगर लगेंगे भी तो कितने बचेंगे, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है. कम से कम हम अपने लिए नहीं भी तो आने वाली पीढ़ी के लिए तो कुछ सोचे.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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