कर्मचारी,अधिकारी ही बन गए है डाकघरों के दुश्मन,वासेपुर उप डाकघर में सामने आया एक और बड़ा घोटाला!

    कर्मचारी,अधिकारी ही बन गए है डाकघरों के दुश्मन,वासेपुर उप डाकघर में सामने आया एक और बड़ा घोटाला!

    धनबाद(DHANBAD) डाकघर की विश्वसनीयता को कार्यरत कर्मचारी और अधिकारी ही दीमक की तरह चाट रहे हैं. गिरिडीह में घोटाला, धनबाद के गोविंदपुर के केके पॉलिटेक्निक डाकघर में घोटाला और अब उसके बाद वासेपुर उप डाकघर में भी एक बड़ा घोटाला सामने आया है .धनबाद जिले के डाकघरों में एक के बाद एक घोटाले की परत खुल रही है. गोविंदपुर स्थित केके पॉलिटेक्निक डाकघर में 9.38 करोड रुपए का घोटाला पकड़ में आया था. सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिक  दर्ज की है. इसी बीच वासेपुर उप डाकघर से उससे भी बड़ा घोटाला सामने आया है. यह अलग बात है कि फिलहाल कमेटी बनाकर विभाग मामले की जांच कर रहा है. इस घोटाले में भी सब पोस्टमास्टर का नाम सामने आया है. घोटाले में कौन-कौन  लोग शामिल हैं, इसकी विभागीय जांच चल रही है.

     वित्तीय वर्ष 21-22 के दौरान सब खेल 

    सूत्रों के अनुसार वासेपुर उप डाकघर में वित्तीय वर्ष 21-22 के दौरान यह सब खेल हुआ है. सब पोस्टमास्टर की आईडी से 14 से 15 करोड रुपए की अतिरिक्त निकासी हुई है. यह मामला कैसे सामने आया है, इसका पता नहीं चला है लेकिन बताया जा रहा है कि मामला गंभीर है और इसकी विभागीय जांच चल रही है.  चर्चा है कि गोविंदपुर के केके पॉलिटेक्निक डाकघर के घोटाले में जिस एक अधिकारी का नाम सामने आया था, इस अधिकारी की भूमिका वासेपुर उप डाकघर की भी गड़बड़ी  में है. सूत्रों के अनुसार विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी.

    डाक विभाग के कर्मी ही विभाग के दुश्मन क्यों बन गए

    सीबीआई धनबाद की टीम ने 16 अप्रैल 2024 को गोविंदपुर के केके पॉलिटेक्निक पोस्ट ऑफिस में हुए 9.38 करोड रुपए से अधिक के गड़बड़ी की प्राथमिक दर्ज की थी. सीबीआई इसकी जांच कर रही है .मामले में तीन चार लोग आरोपी बनाए गए हैं. सूत्र बताते हैं कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कुछ और मामले सामने आ सकते हैं. आखिर डाक विभाग के कर्मी ही विभाग के दुश्मन क्यों बन गए हैं. खुद के लाभ के लिए पूरी डाक व्यवस्था को ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिए हैं .आज भी लोगों का भरोसा डाक विभाग पर अधिक है. कम से कम अवकाश प्राप्त लोग तो अभी भी डाकघर की विभिन्न योजनाओं में पैसा जमा कर ब्याज की राशि से अपना खर्च चलाते हैं. क्या डाकघर में ऐसी कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है.  गड़बड़ी करने के सालों साल बाद मामले का खुलासा होता है. अब देखना है वासेपुर उप डाकघर से जो गलत निकासी की गई है, उसमें किन-किन लोगों के नाम सामने आते हैं.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो


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