मन में विश्वास लिए चलकर बाबाधाम पहुंचे हैं बुजूर्ग श्रद्धालु

    मन में विश्वास लिए चलकर बाबाधाम पहुंचे हैं बुजूर्ग श्रद्धालु

    देवघर (DEOGHAR): कहते हैं पूजा-अर्चना की कोई उम्र नहीं होती. यही कारण है कि सावन माह में देवघर आने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. 65 साल से ज्यादा उम्र के वृद्ध पिछले 20 से 30 सालों से लगातार बाबा का जलार्पण कर अपनी मनोकामना पा रहे हैं. सावन माह जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे देवघर के कांवरिया पथ पर कांवरियों का जनसैलाव उमड़ रहा है. प्रतिदिन लाखों की संख्या में कई वर्गो में बाबाधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या में वृद्ध श्रद्धालु भी पिछले 20 से 30 सालों से लगातार बाबा का जलार्पण कर अपनी मनोकामना पा रहे हैं.

    देवघर स्थित बैद्यनाथधाम को कामनालिंग भी कहा जाता है. यही कारण है कि श्रावण माह में यहा लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा का जलार्पण कर अपनी मनोकामना मांगते है. कांवरिया पथ से लेकर मंदिर तक का नजारा देख कर आप भी अंदाजा लगा सकते है कि युवा पीढ़ी से ज्यादा ऊर्जावान वृद्ध दिखाई दें रहे हैं. बाबा की महिमा ही है कि 65 साल से ज्यादा उम्र होने के बाबजूद इनकी भक्ति और शक्ति में कोई कमी नहीं दिख रही है.

    पूर्ण होती हैं सभी मनोकामना

    वृद्ध श्रद्धालुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में वृद्ध महिला श्रद्धालु भी लगातार बाबाधाम पहुंच कर अपनी मनोकामना मांग रही हैं. इनमें से अधिकांशों का मानना है कि जो भी मनोकामना मांगते है बाबा बैद्यनाथ अवश्य पूरी कर देते हैं. यही कारन है कि वे कई वर्षों से बाबा का जलार्पण करने सावन में यहां आती हैं.

    अटूट विश्वास

    भक्ति भाव से की गई पूजा अवश्य सफल होती, यही कारन है कि अपने जीवन के 65 बसंत से ज्यादा देख चुके ये वृद्ध श्रद्धालु अटूट विश्वास के साथ सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर कामनालिंग पर जलार्पण कर अपनी मनोकामना की झोली भर कर जाते हैं.

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा, देवघर


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