दुमका: हंसडीहा बैंक लूट मामला: अब तक पुलिस के हाथ खाली, बैंक की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

    दुमका: हंसडीहा बैंक लूट मामला: अब तक पुलिस के हाथ खाली, बैंक की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

    दुमका (DUMKA): गुरुवार को अपराधियों ने दुमका के हंसडीहा थाना से महज 500 मीटर दूर इंडियन बैंक की हंसडीहा शाखा में लूट की घटना को अंजाम दिया था. बाइक से 5 की संख्या में आए अपराधियों ने हथियार के बल पर लगभग 19 लाख रुपए लूट कर आराम से चलते बने. घटना के 48 घंटे बीतने के बाबजूद अभी तक पुलिस के हाथ खाली है. पुलिस तमाम बिंदुओं पर जांच में जुटी है. आज नहीं तो कल हो सकता है मामले का उद्भेदन भी हो जाए, लेकिन बैंक की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे हैं.

    बैंक की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

    दुमका में अपराधियों द्वारा बैंक लूट की घटना कोई नई नहीं है. कभी ब्रांच में डाका डाला जाता है तो कभी सेंधमारी की घटना घटित होती है. 6 वर्ष पूर्व शहर में पीएनबी बैंक लूट मामला हो या फिर महारो में बैंक लूट मामला, अब तक पूरी तरह मामले का अनुसंधान नहीं हो पाया. लेकिन जिस प्रकार इंडियन बैंक की हंसडीहा शाखा में अपराधियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया उससे बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे है. खासकर ग्रामीण क्षेत्र में आज भी अधिकांश बैंक शाखा की सुरक्षा चौकीदार के हाथ मे है जो महज एक डंडे के सहारे सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहते हैं. इसके अलावे सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी लगाए जाते हैं. इसके बाबजूद हंसडीहा में इंडियन बैंक लूट मामले के सीसीटीवी फुटेज को देखें तो बेख़ौफ़ नजर आ रहे हैं.

    डिजिटल इंडिया के दौर में गली मोहल्ले खुल गए बैंक शाखा, सुरक्षा का नहीं रखा ध्यान

     केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजना का लाभ लेने हेतु लाभुकों का बैंक एकाउंट होना आवश्यक कर दिया गया. बिचौलिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से डीबीटी के माध्यम से राशि को खाता में ट्रांसफर किया जाने लगा. नतीजा शहर के चौक चौराहे से लक्ट गांव की गलियों तक विभिन्न बैंकों की शाखा खुल गयी. डिजिटल इंडिया के दौर में खाता धारकों को इसका लाभ तो मिल रहा है, लेकिन बैंक की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखा गया.

    हंसडीहा बैंक लूट मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल

    हंसडीहा में जिस प्रकार अपराधियों ने दिन दहाड़े बैंक लूट की घटना को अंजाम दिया उससे थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. बैंक की सुरक्षा का जिम्मा थाना पर भी होती है. अमूमन पुलिस की गश्ती दल बैंक के आस पास से गुजरती है या फिर कुछ समय तक रुककर बैंक के सामने समय बिताती है. अपराधियों में यह ख़ौफ़ पैदा करने के लिए की कभी भी पुलिस आ सकती है. लेकिन यहां तो थाना से महज 500 मीटर दूर अपराधी घटना को अंजाम देते वक्त बेख़ौफ़ नजर आ रहे हैं. हंसडीहा थाना गोड्डा जिला के साथ साथ बिहार का सीमावर्ती थाना है, यहां पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. क्योंकि अपराधी घटना को अंजाम देकर आसानी से बिहार की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं.

    बैंक लुटेरा :- पेशेवर या अनाड़ी!

    जिस प्रकार सीसीटीवी लगे होने के बाबजूद अपराधियों में कुछ नकाबपोश तो कुछ खुले चेहरे से बैंक लूट की घटना को अंजाम दिया उससे तो लगता है कि अपराधी अनाड़ी है। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि वो पेशेवर अपराधी रहा हो. अपराधियों को पता है कि राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव को लेकर थाना में पुलिस बल की संख्या कम रहती है. थाना के पुलिस पदाधिकारी और जवान की प्रतिनियुक्ति मेला क्षेत्र में होती है. सीमित संसाधन में थाना चलाना थाना प्रभारी के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहता ह.  इसलिए अपराधी श्रावणी मेला का समय चुना हो. वहीं घटना को अंजाम देकर सकुशल भागने में भी आसानी होगी. क्योंकि श्रावणी मेला में दुमका जिला की हर सड़कों पर केसरिया वस्त्रधारी कांवरियों का जत्था चलता है. घटना स्थल से निकल कर कुछ दूर बाद अगर अपराधी बोल बम का ड्रेस पहन लें तो फिर उसे पकड़ना काफी मुश्किल है. इस मामले में भी ऐसा हुआ हो, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

    घटना के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए निश्चित रूप से पुलिस जगह जगह छापेमारी कर रही होगी. देर सवेर अपराधी भी सलाखों के पीछे पहुचेंगे, लेकिन सवाल उठता है कि लूटी हुई रकम में से पुलिस कितना बरामद कर पाती है.

    रिपोर्ट: पंचम झा


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