दुमका: अजूबा है दुधानी टॉवर चौक, इसके सामने GMT फेल, एक ही जगह बताएगा चार समय

    दुमका: अजूबा है दुधानी टॉवर चौक, इसके सामने GMT फेल, एक ही जगह बताएगा चार समय

    दुमका: भौगोलिक घटना क्रम के अनुरूप विश्व के विभिन्न देशों में समय का निर्धारण GMT यानी ग्रीनविच मेरिडियन टाइम से होता है जो लंदन से गुजरता है. जीएमटी से पूर्व या पश्चिम बढ़ने पर समय बढ़ता है या घटता है. लेकिन वर्तमान समय में दुमका का दुधानी टॉवर चौक GMT को भी पीछे छोड़ चुका है. यह स्थल अपने आप में अजूबा है. टॉवर पर लगी घड़ियों को चार दिशाओं से देखने पर अलग अलग समय आपको दिखेगा. अजूबा इस मायने में भी है कि हर वक्त एक ही समय बताएगा.

    वास्तु शास्त्र के अनुरूप बंद घड़ी को माना जाता है अशुभ

    आप समझ चुके होंगे कि दुधानी स्थित टॉवर में लगी चार घड़ियां वर्षों से बंद पड़ी है. वास्तु शास्त्र के अनुरूप बंद घड़ी को अशुभ माना जाता है. कहा जाता है कि घर में बंद घड़ी रखने से विकास अवरुद्ध हो जाता है. अब जरा सोचिए कि दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर लगी घड़ियां बंद है. तो यह मान लिया जाए कि दुमका का विकास अवरुद्ध है.

    टॉवर चौक के जीर्णोद्धार के नाम पर खर्च हुए लगभग डेढ़ लाख रुपए, नहीं दुरुस्त हो सकी घड़ियां

    ऐसा नहीं है कि दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर जिला प्रशासन की नजर नहीं है. आरटीआई से इस बात का खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2024 _ 2025 में डीएमएफटी से दुधानी टॉवर चौक के जीर्णोद्धार पर लगभग एक लाख 32 हजार रुपए खर्च किए गए. जीर्णोद्धार के नाम पर रंग रोगन के अलावे कुछ नहीं हुआ. स्थानीय अब्दुल हामिद बताते है कि टॉवर का ऊपरी हिस्सा टूटकर गिर रहा है, कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ राज कुमार उपाध्याय का मानना है कि जब डीएमएफटी से इसका जीर्णोधार हुआ तो घड़ियों को भी दुरुस्त करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता हिमांशु हुराद कहते है कि एस्टीमेट के अनुरूप लगभग डेढ़ लाख रुपए खर्च कर टावर के रंग रोगन का कार्य किया गया है. उन्होंने घड़ी को जल्द दुरुस्त करवाना का भरोसा दिया है.

    इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक पर है टॉवर चौक के रख रखाव का जिम्मा

    जानकार बताते है कि वर्ष 1998 में तत्कालीन सांसद बाबूलाल मरांडी के सांसद निधि से दुधानी चौक पर टावर का निर्माण कराया गया. दुमका शहर के प्रवेश द्वार पर टॉवर के निर्माण से शहर को एक नई पहचान मिली। वर्तमान समय में इसके रख रखाव का जिम्मा इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक (1अप्रैल 2020 को इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय हो चुका है) पर है. टॉवर के चारों तरफ बैंक का होर्डिंग लगा है.

    जब रख रखाव का जिम्मा बैंक पर तो फिर DMFT फंड से जीर्णोधार क्यों!

    अब ऐसे में सवाल उठता है कि रख रखाव का मतलब क्या सिर्फ अपने संस्थान का प्रचार प्रसार करना है? क्या बैंक दिवालिया हो चुका है? रंग रोगन का कार्य डीएमएफटी फंड से क्यों? यह तो रख रखाव का जिम्मा लेने वाले संस्थान का दायित्व है। कम से कम टॉवर पर चार दिशाओं में लगी घड़ी को तो दुरुस्त कर दे ताकि दुमका का समय सही हो सके.

    बैंक अगर घड़ी भी दुरुस्त नहीं कर सकता तो प्रशासन निजी हाथ में सौंप दे टॉवर चौक

    अगर वह भी नहीं कर सकता तो प्रशासन को चाहिए कि इंडियन और इलाहाबाद बैंक के बदले रख रखाव की जिम्मेदारी निजी हाथों में सौंप दे. जिले के कई ऐसे लोग है जो शहर के चौक चौराहों पर अपने संस्थान का प्रचार प्रसार के लिए रुपए देकर बैनर और होर्डिंग्स लगाते है. शहर के प्रवेश द्वार पर अपने संस्थान का प्रचार प्रसार कौन नहीं करना चाहेगा.

    सीएम हेमंत सोरेन की कर्मस्थली है दुमका, छोटे भाई बसंत सोरेन है यहां के विधायक

    बहरहाल इस मामले में जिला प्रशासन को पहल करने की जरूरत है. जैसे भी हो टॉवर पर लगी घड़ियों को दुरुस्त किया जाए ताकि इस मार्ग से गुजरने वाले विभिन्न प्रांतों के लोग दुमका की एक बेहतर छवि लेकर आगे बढ़े. वैसे भी यह जिला सीएम हेमंत सोरेन की कर्मस्थली है। वर्तमान समय में सीएम के अनुज बसंत सोरेन यहां के विधायक है.


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