देश के कोयलाकर्मियों का सीधा सवाल: EPFO की तरह CMPFO पर क्यों नहीं है सरकार का ध्यान?

    देश के कोयलाकर्मियों का सीधा सवाल: EPFO की तरह CMPFO पर क्यों नहीं है सरकार का ध्यान?

    धनबाद(DHANBAD): कोयलांचल सहित समूचे कोयला  उद्योग के  कोयलाकर्मी सवाल कर रहे हैं कि- हम लोगों के साथ आखिर भेदभाव क्यों ?उन लोगो ने तो प्रकृति के खिलाफ काम कर राष्ट्र की सेवा की है. उन्हें जहां तरजीह मिलनी चाहिए ,वहां  उनके साथ  भेदभाव  किया जा रहा है. इस सवाल का जवाब उन्हें कब मिलेगा, मिलेगा भी कि नहीं, यह वह नहीं जानते.  ईपीएफओ से जुड़े कर्मचारियों के लिए आधुनिक  सुविधा मुहैया कराई जा रही है.  तो कोयलाकर्मियों को उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया गया है.  बता दे कि  ईपीएफओ अब बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने जा रहा है.  खाता धारकों को एटीएम की सुविधा देने की तैयारी है.  वही कोयलाकर्मियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सीएमपीएफओ (कोयला खदान भविष्य निधि संगठन) अभी तक पूरी तरह से ऑनलाइन तक नहीं हुआ है. इसका हेड ऑफिस धनबाद में है.  फिर सुविधा मिलने का सवाल कहां उठता है? 

    सीएमपीएफओ से जुड़े कोयलाकर्मियों की नहीं कम हो रही परेशानी 
     
     बोर्ड की बैठक में कई बार यह मामला उठा, लेकिन आज भी इससे जुड़े कोयलाकर्मियों को पूरी तरह से ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है.  अभी कई स्तरों पर उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है.  सीएमपीएफओ से लगभग 5 लाख से अधिक पेंशनर जुड़े हुए है.  चार लाख पीएफ खाता धारक भी है.  नवंबर महीने में भी यह मामला जोर-शोर से उठा था.  अभी तक पेंशन पे  आर्डर(पीपीओ ) का मुद्दा भी बना हुआ है.  इस कारण विधवा पेंशन मतलब- पेंशनर की मौत हो जाने पर पत्नी की पेंशन तुरंत चालू नहीं हो पा रही है.  रिकॉर्ड में गड़बड़ी की बात कह कर उसे टाल दिया जाता है.  परेशानी  यह होती है कि सीएमपीएफओ के पास जो आंकड़े उपलब्ध है,और कोयला मैनेजमेंट जो आंकड़े देता है.  वह मेल  नहीं खाते.  इस वजह से काम पेंडिंग हो जाता है.  कहा जाता है कि सीएमपीएफओ को भी पूरी तरह से ऑनलाइन करने की तैयारी चल रही है.  यह भी बताया गया है कि ऑनलाइन से संबंधित फेज वन का काम हो गया है.  फेस टू का काम चल रहा है.  वैसे तो कोयला कर्मियों के पेंशन की राशि को लेकर भी विवाद चल रहा है.  पहले जो कोयलाकर्मी  रिटायर हुए हैं, उनमें कई  को 1000 से भी कम पेंशन मिलती  है.  इसके लिए आंदोलन भी होते रहे है.  कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है. 

    ईपीएफओ अपने सिस्टम को केंद्रीयकृत करने का काम इस महीने पूरा कर लेगा 

    बता दे कि  रोजगार मंत्रालय के आदेश पर ईपीएफओ अपने सिस्टम को केंद्रीयकृत करने का काम इस महीने के अंत तक पूरा कर लेगा.  इसके बाद फरवरी से नाम में गलती या अन्य किसी वजह से पीएफ खाते से धनराशि निकालने  में परेशानी नहीं होगी.  यह भी जानकारी है कि मई - जून तक ईपीएफओ का सारा सिस्टम बैंकिंग की तरह काम करना शुरू कर देगा. ईपीएफओ अपने आईटी सिस्टम 3-0 पर भी काम कर रहा है.  जिसका मुख्य उद्देश्य खाता धारकों की फंड तक पहुंच आसान बनाना और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना है.  इसके पूरा होने के बाद ईपीएफओ बैंकिंग सिस्टम की तर्ज पर काम करने लगेगा.  आपातस्थिति में आवश्यकता होने पर सदस्य एक निश्चित धनराशि की निकासी कर सकते है. एक आकड़े के अनुसार नवंबर 2024 में, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्यों की संख्या 7.37 करोड़ थी. वित्तीय वर्ष 2023-24 में, ईपीएफ़ओ के सदस्यों की संख्या में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ईपीएफ़ओ, भारत सरकार के श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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