धनबाद के सपनो को नहीं मिलते पंख,जानिए डी पी आर के खेल में कैसे उलझा दी जाती है योजनाएं 

    धनबाद के सपनो को नहीं मिलते पंख,जानिए डी पी आर के खेल में कैसे उलझा दी जाती है योजनाएं 

    धनबाद(BOKARO): धनबाद में सपने बहुत दिखाए जाते हैं. सुविधा बढ़ाने की घोषणाएं बहुत की जाती है. लेकिन हर एक तकनीकी पहलू पर विचार नहीं किया जाता है. नतीजा होता है कि कई योजनाएं ऊपरी स्तर पर जाकर रद्द हो जाती हैं. कई तो अनुमति मिलने के बाद भी शुरू नहीं होती. जो कुछ शुरू भी हो जाती है तो वह ठोस ढंग से पूरी नहीं की जाती. धनबाद में इलेक्ट्रिक बस सेवा का भी यही हाल है. जानकारी मिली है कि निगम की इलेक्ट्रिक बस सेवा की डीपीआर को सूडा ने स्वीकार नहीं किया है. सूडा यानी स्टेट अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 15 रूटों पर 120 सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की डीपीआर को तकनीकी खामियां बताते हुए वापस कर दिया है. सिटी बस सेवा के तहत इस योजना की डीपीआर बनाने वाली कंपनी को इसमें संशोधन कर डीपीआर फिर से तैयार करने को कहा गया है. रांची में इलेक्ट्रिक बस सेवा को लेकर आहूत बैठक में धनबाद की योजना का प्रजेंटेशन दिया गया. सूडा के अधिकारियों ने रूट पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब 29 रूटों पर सर्वे किया गया है तो फिर 15 रूट पर ही इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की डीपीआर क्यों बनाई गई है. कहा गया कि इस योजना का मकसद ही है अधिक से अधिक रूटों पर सुविधाएं प्रदान की जाए. मतलब अब फिर से सर्वे होगा और फिर से डीपीआर बनेगी . यह भी योजना डीपीआर के खेल में फसेंगी. धनबाद का यह भी एक दुर्भाग्य है कि यहां की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कोई योजना नहीं बनाई जाती. जो योजना दूसरे शहर में काफी कारगर हो सकती हैं, वह धनबाद के लिए सही नहीं हो सकती. धनबाद की जमीनी हकीकत को जानकर ही अगर योजनाएं बनाई जाएं तो उस पर काम हो सकता है. धनबाद की सड़कों का हाल तो सबको मालूम है. सड़के वही है लेकिन वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. सड़कों का अतिक्रमण भी किया गया है. सोमवार को ही सड़क सुरक्षा  की बैठक में निर्णय लिया गया है कि शहर के मुख्य सड़कों से अतिक्रमण हटाया जाए. हालांकि ऐसा आदेश पहले भी हुआ है लेकिन कार्रवाई कुछ भी नहीं हुई है .जरूरत है पहले जो निर्णय लिए गए हो या आदेश दिए गए हो उसकी पुख्ता ढंग से समीक्षा हो. आदेश की अवहेलना हुई हो तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए, तब जाकर कुछ सुधार संभव है. अन्यथा कागज पर आदेश जारी होते रहेंगे और जनता  परेशान रहेगी.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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