धनबाद : नक्शा पास करने के अधिकार को लेकर फिर टकरा सकते हैं दो सरकारी विभाग ,जानिए क्या है पूरा मामला 

    धनबाद : नक्शा पास करने के अधिकार को लेकर फिर टकरा सकते हैं दो सरकारी विभाग ,जानिए क्या है पूरा मामला 

    धनबाद(DHANBAD): ग्रामीण क्षेत्र का नक्शा पास करने को लेकर धनबाद में एक बार फिर जिला परिषद और झारखण्ड खनिज विकास प्राधिकार  में  तकरार हो सकती है. अभी नक्शा पास झारखण्ड खनिज विकास  प्राधिकार करता है जबकि जिला परिषद अब यह अधिकार अपने पास रखने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है. जिला परिषद बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया है.  इसके पहले भी नक्शा पास करने का प्रस्ताव लिया गया था. लेकिन इस पर किसी कारण से अमल नहीं हो सका. जानकारी के अनुसार जिला परिषद में नक्शा पास कराने तथा इसकी जांच के लिए इंजीनियर तथा आर्टिटेक 
    निबंधन करा लिए है. 

    पहले भी लिया गया था निर्णय 

    जानकारी के मुताबिक 3 आर्टिटेच  और 3 इंजीनियर ने निबंधन कराया है. तैयारी है कि मकान तथा अन्य सभी तरह के निर्माण के लिए नक्शा ऑनलाइन पास होंगे.  इसके लिए आवेदन भी ऑनलाइन मांगा जिएगा. दोनों व्यवस्थाओं के लिए जिला परिषद की ओर से तकनीकी सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे है.  इसके लिए सॉफ्टवेयर तथा वेबसाइट बनाने का काम जल्द शुरू होगा.  डीडीसी सह जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने निर्देश जारी कर दिए है. अभी झारखण्ड खनिज विकास  प्राधिकार ग्रामीण क्षेत्रों में मकान तथा अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए नक्शा पास करता है. नई व्यवस्था लागू हो गई तो यह अधिकार जिला परिषद के पास चला जाएगा. जिला परिषद की बैठक में आय बढ़ाने की बात होती है, हर बैठक में बात होती है कि जिला परिषद की आमदनी बढ़नी  चाहिए. 

    अधिकार मिला तो बढ़ेगी आमदनी 
     
    नक्शा पास करने का काम अगर जिला परिषद करेगी तो निश्चित रूप से आमदनी में इजाफा होगा.  वैसे भी जिला परिषद के पास धनबाद जिले में बहुत सारी परिसंपत्तियां  है. जिला परिषद दुकानों का भी निर्माण कराया है, उससे भाड़ा  वसूलने की व्यवस्था है, लेकिन दुकानों का भाड़ा बहुत दिनों से बकाया रहने की बात उठती रहती है.  इधर, नई जिला परिषद बोर्ड  के गठन के बाद फिर एक बार आय  बढ़ाने के काम में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष में पटरी नहीं है. उपाध्यक्ष ने अभी हाल ही में विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें ना वाहन और ना ही आवास की सुविधा दी जा रही है, जबकि वह सुदूर उग्रवाद प्रभावित तोपचांची  से आती है और रात में भी उन्हें क्षेत्र के भ्रमण को जाना होता है. देखना है विभागीय मंत्री इस पर क्या निर्देश जारी करते हैं लेकिन जिला परिषद के हर एक बैठक में फिलहाल तू तू मैं मैं का माहौल दिखता है.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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